जोधपुर.
राजस्थान हाईकोर्ट (rajasthan highcourt) ने जोधपुर जिले के फलौदी (phalodi) कस्बे में नगर पालिका (nagar palika phalodi) की ओर से विकसित की जा रही स्वामी विवेकानंद नगर आवासीय योजना को निरस्त कर दिया है।
कोर्ट ने राज्य स्तरीय भू-उपयोग परिवर्तन समिति (State level land use change committee)के उस आदेश को भी अपास्त कर दिया जिसमें आवासीय योजना के लिए उपयोग में ली जा रही भूमि का उपयोग बदला गया था।
वरिष्ठ न्यायाधीश संगीत लोढ़ा तथा न्यायाधीश पीके लोहरा की खंडपीठ ने रोशन व्यास की ओर से दायर जनहित याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि राज्य स्तरीय कमेटी और फलौदी नगर पालिका की ओर से की गई कार्यवाही पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी द्वारा दायर पत्र याचिका में दिए गए निर्देशों के विपरीत है।
इस याचिका में खंडपीठ ने जलस्रोत, जंगल, पर्वत तथा प्राकृतिक स्थलों के संरक्षण के लिए व्यापक निर्देश दिए थे। याचिका के अनुसार फलौदी नगरपालिका के प्रस्ताव पर सहमति जताते हुए राज्य स्तरीय भू-उपयोग परिवर्तन समिति ने 9 मई, 2008 को फलौदी के खसरा नं-573 की 47 बीघा से अधिक भूमि का भू-उपयोग परिधिय नियंत्रण पट्टी से आवासीय प्रयोजनार्थ किया था।
जिस भूमि का भू-उपयोग बदला गया वह राजस्व रिकॉर्ड में गैर मुमकिन पाल यानी कैचमेंट का हिस्सा थी। नगर पालिका ने भू-उपयोग परिवर्तन के करीब दस साल बाद 15 मार्च, 2018 को इस भूमि पर स्वामी विवेकानंद नगर आवासीय योजना (Vivekananda Nagar Residential Scheme) लांच की।
सुनवाई के दौरान नगर पालिका की ओर से कहा गया कि आवासीय योजना की पिछले साल 21 मई को लॉटरी निकाल 167 भूखंड आवंटित किए गए। इनमें से कई आवंटियों को भवन निर्माण अनुज्ञा भी जारी की जा चुकी है। राज्य सरकार ने भी अपने निर्णय को सही ठहराने के लिए दलीलें दी। खंडपीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आवासीय योजना तथा भू-उपयोग परिवर्तन समिति के निर्णय को निरस्त कर दिया।
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