खराब लैपटॉप बेचा, अब देने पड़ेंगे 74 हजार

पोस्ट पसंद आये तो लाइक जरुर करे ?

जोधपुर.

उपभोक्ता अदालत (Consumer court) ने लैपटॉप बेचने वाली एक कंपनी के खिलाफ पेश परिवाद का आठ महीने में निस्तारण कर त्वरित न्याय का उदाहरण पेश किया है।


मामले के अनुसार कमला नेहरू नगर निवासी रुचिरा अग्रवाल पत्नी डॉ. हरीश अग्रवाल ने 8 दिसम्बर, 2017 को असूस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के अधिकृत विक्रेता चौपासनी रोड स्थित डागा टेक्नोक्रेट प्राइवेट लिमिटेड से 56 हजार रुपए में लैपटॉप खरीदा।

चार महीने बाद ही तकनीकी खराबी के चलते लैपटॉप ने काम करना बंद कर दिया। डीलर से संपर्क करने पर लैपटॉप को रिपेयरिंग के लिए अधिकृत सर्विस सेंटर पर दे दिया।

लेकिन लैपटॉप फिर खराब हो गया। यह स्थिति लगातार चलती रहने पर व्यथित होकर परिवादिया ने उपभोक्ता अदालत में परिवाद पेश किया।अधिवक्ता कपिल बोहरा ने अदालत को बताया कि कंपनी तथा डीलर ने त्रुटिपूर्ण लैपटॉप बेचा और वापस ठीक करके नहीं दिया। इसलिए सेवादोष, अनुचित व्यापार व्यवहार के कारण हुई मानसिक वेदना के लिए ढाई लाख रुपए मुआवजा दिलाया जाए।

अप्रार्थीगण की ओर से कोई जवाब नहीं आने पर जिला उपभोक्ता अदालत द्वितीय के कार्यवाहक अध्यक्ष अतुलकुमार चटर्जी तथा सदस्य डॉ. अनुराधा व्यास ने अप्रार्थीगण को एक महीने में लैपटॉप की कीमत 56 हजार रुपए 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित देने और मानसिक, शारीरिक, आर्थिक क्षति और परिवाद व्यय के तौर पर 18 हजार रुपए देने का आदेश दिया।

ऑनलाइन जमा करवाए 42 हजार, फिर भी नहीं आया आइफोन
कोर्ट ने दिया 11 हजार रुपए हर्जाना देने का आदेश

जिला उपभोक्ता अदालत प्रथम (District Consumer Court (First)) ने रुपए जमा कराने के बाद भी ऑनलाइन कम्पनी द्वारा आइफोन 6 नहीं भेजने को सेवा में गम्भीर कमी मानते हुए कंपनी को मोबाइल की कीमत 42 हजार 299 रुपए नौ फीसदी ब्याज के साथ चुकाने और परिवादी को अलग से 11 हजार रुपए बतौर हर्जाना देने का आदेश दिया।

परिवादी विपुल भारती ने माई स्मार्ट प्राइस वेब टेक्नोलॉजिज प्राइवेट लिमिटेड हैदराबाद की वेबसाइट पर आइफोन 6 का ऑर्डर किया था। परिवादी ने मोबाइल की कीमत 42 हजार 299 रुपए मनी वॉलेट के जरिए प्रबंधक साइबरपेस ई सोल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड को 18 फरवरी

2016 को जमा करवा दी। एक महीने बाद भी मोबाइल फोन की डिलीवरी नहीं दी। परिवादी के अधिवक्ता अनीष अहमद ने मंच को बताया कि लीगल नोटिस देने के बाद भी कोई जवाब नहीं दिया।

निर्णय से पूर्व परिवादी को अप्रार्थी संख्या दो ने 18 जून 16 को अपनी भूल स्वीकार करते हुए परिवादी को राशि लौटाना स्वीकार किया तथा 46 हजार 110 रुपए का चैक भेजा, लेकिन वह भी बाउंस हो गया।

जिला उपभोक्ता अदालत (प्रथम) के अध्यक्ष अतुलकुमार चटर्जी तथा सदस्य राजाराम सर्राफ परिवादी के पक्ष में फैसला सुना दिया।



from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/30ff4kG
Share on Google Plus

About Atul

This is a short description in the author block about the author. You edit it by entering text in the "Biographical Info" field in the user admin panel.

0 comments:

Post a Comment