पाकिस्तान का भारत पर टिड्डी हमला, सीमा पार से आए 25 टिड्डी दलों से बॉर्डर पर हाई अलर्ट

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गजेंद्र सिंह दहिया/जोधपुर. पाकिस्तान ने भारत को नुकसान पहुंचाने के लिए टिड्डी को पनाह दी है। पाकिस्तान ने राजस्थान की सीमा से लगे सिंध प्रांत में एक माह तक टिड्डी के अण्डों पर पेस्टीसाइड स्प्रे नहीं किया। ये अण्डे जीवन चक्र की पांचों अवस्थाएं पार कर बड़े दल में बदल गए हैं।

पिछले 5 दिन में पाकिस्तान बॉर्डर से 20 से 25 टिड्डी दल ने भारत पर हमला किया है। चार महीने पहले भारत में टिड्डी का प्रवेश हुआ था। उसके बाद पहली बार करोड़ों टिड्डी बीकानेर, जैसलेमर और जोधपुर जिले में घुस गई है। बीकानेर में 8 किलोमीटर लंबा और आधा किलोमीटर चौड़ा टिड्डी दल रिकॉर्ड किया गया। इसे नियंत्रित करने के लिए बीकानेर में तकनीशियनों की 10 टीम ने लगातार पेस्टीसाइड स्प्रे कर टिड्डी दल फिलहाल आगे बढऩे से रोक दिया है। बॉर्डर पर टिड्डी नियंत्रण की 45 टीमें टिड्डियों पर स्प्रे कर रही है।

इधर, अच्छे मानसून के कारण खेतों में खड़ी मूंग, मोठ, चवला, ग्वार, बाजरा की फसल को लेकर किसान चिंतित हैं। अलार्मिंग सिचुऐशन देखते हुए टिड्डी चेतावनी संगठन ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर किसानों को खेतों में छिडकऩे के लिए हल्के पेस्टीसाइड उपलब्ध करवाने के लिए कहा है ताकि किसान खुद टिड्डी से निपट सकें। राज्य प्लांट प्रोटेक्शन संयुक्त निदेशक (कृषि) डॉ. सुआलाल जाट तीन दिन से लगातार जैसलमेर के सीमावर्ती क्षेत्रों में टिड्डी नियंत्रण की स्थिति का जायजा ले रहे हैं।

पाकिस्तान ने नहीं किया एरियल स्प्रे
जम्मू कश्मीर में 5 अगस्त को धारा-370 हटाई गई। उस समय टिड्डी लगभग नियंत्रण में थी। इसके बाद से पाकिस्तान ने राजस्थान की सीमा से लगते रहीमयार खान, सुकुर और बहावलपुर इलाके में टिड्डी पर पेस्टीसाइड स्प्रे बंद कर दिया। जबकि भारत ने अपने क्षेत्र में टिड्डी लगातार स्प्रे जारी रखा और अण्डों से निकले हॉपर्स को वयस्क नहीं बनने दिया। पाकिस्तान ने अपनी वायुसेना के सुकुर एयरबेस पर भारत को दिखाने के लिए एरियल स्प्रे किट लगा विमान खड़ा किया था। भारत को पाकिस्तान की चाल अब समझ में आई क्योंकि टिड्डी के अण्डे को वयस्क होने में एक से डेढ़ महीना लगता है।

परेशान हो रहे किसान
देश में टिड्डी का इस स्तर का आउटब्रेक 1993 में हुआ था। तब कई फसलों को नुकसान पहुंचा। इसके बाद 2005 व 2010 में भी टिड्डी आई लेकिन उस समय काबू कर लिया गया था। इस समय जैसलमेर के भारेवाला, बहाला, मोहनगढ़, म्याजलार, रामगढ़, भादरिया, पोकरण, रामदेवरा, खेतोलाई, नेवास, बीकानेर के गजेवाला, भीकमपुर, जोधपुर के फलोदी, बाप व लोहावट इलाके में टिड्डी दल मौजूद हैं। गजेवाला में आठ किमी लंबा टिड्डी दल देखकर अधिकारियों की आंखें भी फटी रह गई थी।

खाली हो रहे पेस्टीसाइड के ट्रक
टिड्डी पर स्प्रे के लिए मैलाथिन (96 प्रतिशत) काम में लिया जा रहा है। भारत में केवल मुंबई स्थित हिंदुस्तान इंसेक्टीसाइड लिमिटेड (एचआइएल) में इसका उत्पादन हो रहा है। अब तक 93 हजार 455 लीटर मैलाथिन खत्म हो चुका है। बुधवार रात 5 हजार लीटर का ट्रक आया और अब 6600 लीटर का ट्रक और आ रहा है। अब तक कुल 4.13 करोड़ रुपए का मैलाथिन 1 लाख, 34 हजार, 986 हेक्टेयर में स्पे्र किया जा चुका है।

कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही बीएसएफ
जैसलमेर में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवान टिड्डी अधिकारियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं। टिड्डी अधिकारियों की सुविधा के लिए बीएसएफ की सीमा चौकियों पर खाने-पानी की व्यवस्था की गई है। अधिकारी व तकनीशियन बीएसएफ के कैंप में ही रात बिता रहे हैं।

पाकिस्तान के साथ बैठक 19 को
भारत-पाक के टिड्डी नियंत्रण अधिकारियों की 19 सितम्बर को पाकिस्तान के खोखरापार में बैठक प्रस्तावित है। अब तक ऐसी चार बैठकें हो चुकी हैं। पाकिस्तान हर बैठक में भारतीय अधिकारियों को गुमराह कर रहा है। यह बैठक संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन के दिशा निर्देशों की पालना में होती है।

जानिए टिड्डी नियंत्रण के बारे में
- 1 लाख, 34 हजार, 986 हेक्टेयर में अब तक पेस्टीसाइड स्प्रे
- 51 हजार, 924 हेक्टेयर में वयस्क टिड्डी पर पेस्टीसाइड स्प्रे
- 83 हजार हेक्टेयर में हॉपर्स पर किया स्प्रे
- 93 हजार, 455 लीटर मैलाथिन पेस्टीसाइड का स्प्रे
- 442.50 रुपए लीटर है मैलाथिन
- 4.13 करोड़ का मैलाथिन खत्म हो चुका है अब तक

टिड्डी नियंत्रण की टीमें कहां-कहां
- 45 टीमें गाडिय़ों के साथ फील्ड में कर रही स्प्रे
- 10 टीमें बीकानेर में
- 21 टीमें जैसलमेर में
- 7 टीमें फलोदी की जैसलमेर में कर रही सहायता
- 21 मई को पहली बार भारत में रिपोर्ट हुई थी टिड्डी

पूरी ताकत झोंकी
पाकिस्तान की ओर से सकारात्मक प्रयास नहीं करने से 20 से 25 टिड्डी दल घुस गए हैं। हमने पूरी ताकत झोंक रखी है। पेस्टीसाइड का उत्पादन लगातार किया जा रहा है। राज्य सरकार को 10 अतिरिक्त गाडिय़ां उपलब्ध करवाने के लिए कहा है। राज्य सरकार को क्लोरोपायरीफॉस जैसे आधा दर्जन पेस्टीसाइड स्वयं के स्तर पर इस्तेमाल की छूट दी है ताकि हमें कुछ मदद मिल सके।
- डॉ. केएल गुर्जर, उप निदेशक, टिड्डी चेतावनी संगठन जोधपुर



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