अमित दवे/जोधपुर. जोधपुर के करीब 150 निर्यातकों के करीब 100 करोड़ के आइजीएसटी रिफ ण्ड क्लेम आवश्यक दस्तावेजों की कमी के कारण विभाम में अटके पडे है। कारण है निर्यातकों की लापरवाही और देश में फ्रॉड आइजीएसटी रिफण्ड मामला। निर्यातकों को सरकार द्वारा आइजीएसटी रिफ ण्ड करने के लिए कस्टम विभाग में पूरी प्रक्रिया के साथ ऑनलाइन रिफ ण्ड क्लेम फ ाइल करने पड़ते हैं।
शिपिंग बिल, इनवोइस नम्बर, दिनांक, अमाउंट आदि के कारण प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती और कम्प्यूटर में मिसमैच के कारण रिफण्ड का भुगतान अटक जाता है। कुछ निर्यातकों के क्वेरी के जवाब 1 साल बाद भी फाइल नहीं हुए हैं। अगर निर्यातकों द्वारा तय समय सीमा तक क्वेरी का निस्तारण नहीं किया तो उनके आइजीएसटी रिफ ण्ड लेप्स होने का खतरा हो जाएगा। जबकि कस्टम विभाग मिसमैच के कारण निर्यातको के अटके पडे जीएसटी रिफ ण्ड के लिए संबंधित निर्यातकों व अन्य टे्रड एसोसिएशन्स को सूचित कर चुका है।
इनका कहना है...
देश में फ्रॉड आइजीएसटी रिफण्ड मामले को लेकर रिफण्ड भुगता रुके हुए थे। अब रिफण्ड भुगतान होने शुरू हुए है और धीरे-धीरे सबके रिफण्ड हो जाएंगे। हाल ही में 10 क्लेम का भुगतान हुआ है।
कृपाशंकर मीना, डिप्टी कमिश्नर, कस्टम विभाग
जीएसटी को लागू हुए दो वर्ष हो चुके हैं। केंद्र सरकार की ओर से जीएसटी अधिनियम में ढेरों संशोधन के बाद भी कारोबारियों को खास राहत नहीं मिली। जीएसटी लागू होने से पंजीयन प्रक्रिया सरल हुई है लेकिन टेक्सेशन संबंधी प्रक्रिया बेहद कठिन होने से व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
महेन्द्र छाजेड़, उपाध्यक्ष, जोधपुर हैण्डीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन
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