निजी कॉलोनियों में खेल : 10 प्रतिशत राशि जमा करवाई, कपड़े का मानचित्र रोक लिया और बेचने लगे भूखंड

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अविनाश केवलिया/जोधपुर. निजी कॉलोनाइजर्स का ले-आउट प्लान अप्रूव करवाने में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। मात्र 10 प्रतिशत राशि जमा करवा आम जनता को अप्रूव प्रोजेक्ट बता बुकिंग ली जाती है। इससे जेडीए में कई सालों तक फाइनल डिमांड राशि कॉलोनाइजर नहीं भरते और दूसरी ओर आम जनता बुकिंग राशि भी ले रहे हैं। इस बारे में जब शिकायतें मिली तो जेडीए ने अब सख्त कदम उठाए हैं। करोड़ों की बकाया राशि वसूलने का रोडमैप भी तैयार किया गया है। करीब 150 करोड़ से अधिक की राशि ऐसे कॉलोनाइजर्स के पास ही अटकी हुई है।

ऐसे होता रहा है खेल
कोई भी कॉलोनाइजर जमीन पर यदि नई कॉलोनी बसाना चाहता है तो ले आउट प्लान के लिए आवेदन करता है। क्षेत्रफल के लिहाज से 10 प्रतिशत राशि आवेदन के साथ ही जमा होती है। इसके बाद मामला भवन मानचित्र अनुमोदन समिति के पास चला जाता है। कई महीनों में होने वाली इस समिति में जब तक प्रकरण चलता है तब तक वह प्लान अप्रूव्ड नहीं माना जाता। जब समिति अप्रूव्ड करती है तो क्लोथ मीडिया मानचित्र की जरूरत होती है। लेकिन अधिकांश कॉलोनाइजर यह क्लोथ मीडिया प्रस्तुत नहीं करते। इससे अंतिम डिमांड नोट जेडीए जारी नहीं कर पाता। उधर, दूसरी ओर आंशिक अप्रूव्ड बता कर कॉलोनाइजर आमजन को भूखंड बेचना शुरू कर देते हैं।

अब यह जेडीए का निर्णय
जेडीए ने अपनी बैठक में निर्णय किया है कि जो पुराने प्रकरण क्लोथ मीडिया मानचित्र पेश नहीं करने के अभाव में अटके हैं उन्हें 30 दिन का समय दिया गया है। इसके बाद उनका आवेदन खारिज कर दिया जाएगा। अब क्लोथ मीडिया मानचित्र प्रस्तुत होगा तो डिमांड नोटिस निकलेगा और इस प्रोजेक्ट की शेष 90 प्रतिशत राशि भी कॉलोनाइजर को जमा करवानी होगी। ऐसे नए आने वाले प्रकरणों में आवेदन के साथ ही क्लोथ मीडिया मानचित्र प्रस्तुत करना होगा।

क्या होगा फायदा
- आमजन के साथ भूखंड खरीद-बेचान के नाम पर धोखाधड़ी बंद होगी।
- सरकारी विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार व कॉलोनाइजर्स की मिली भगत कम होगी।
- जेडीए का राजस्व करोड़ों रुपए बढ़ेगा।

क्या है क्लोथ मीडिया
पहले किसी प्लान को फाइनल अप्रूव करवाने के लिए बड़ी कागज की शीट पर मानचित्र प्रस्तुत किया जाता था। लेकिन कुछ सालों में उसके फटने का डर रहता था। इसके बाद रेरा ने नियम बदल दिए और उसके स्थान पर कपड़े पर मानचित्र को अप्रूव करने के आदेश जारी हुए हैं। इस मानचित्र पर ही सील-साइन होकर योजना अप्रूव्ड होती है।

फैक्ट फाइल
- 40-50 ऐसी कॉलोनियां हैं जिनके क्लोथ मीडिया सब्मिट नहीं हुए हैं।
- 150 करोड़ से अधिक राशि कॉलोनाइजर्स दबाए बैठे हैं।
- 2-3 साल तक नहीं जमा होते क्लोथ मीडिया।
- 30 दिन में अब क्लोथ मीडिया मानचित्र व डिमांड राशि जमा करवानी होगी।
- 1 ही बार में नए आवेदकों को क्लोथ मीडिया अब जमा करवाना होगा।
- 1 ही बैठक में उस आवेदन पर निर्णय होगा।

इनका कहना...
क्लोथ मीडिया मानचित्र प्रस्तुत नहीं करने से डिमांड नोट नहीं निकाल पाते थे। इससे करोड़ों रुपए अटके हुए थे। अब 30 दिन का समय दिया है। साथ ही आमजन के साथ भूखंड खरीद के नाम पर हो रही ठगी भी रुकेगी।
- गौरव अग्रवाल, आयुक्त, जेडीए जोधपुर



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