जोधपुर.
खान एवं भू-विज्ञान विभाग (Department of Mines and Geology) की ओर से बिना नोटिस दिए लैटर ऑफ इंटेंट और प्रोस्पेक्टिव लाइसेंस निरस्त करने के आदेश को एकलपीठ द्वारा अपास्त किए जाने के खिलाफ दायर अपीलों को राजस्थान हाईकोर्ट (rajasthan highcourt) ने खारिज कर दिया।
कोर्ट ने राज्य सरकार (state govt. of rajasthan) व अन्य पक्षकारों को कहा है कि इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट (suprem court) में लंबित विशेष अनुमति याचिकाओं का अंतिम निर्णय सभी पर बाध्यकारी होगा।
मुख्य न्यायाधीश एस.रविंद्र भट्ट और न्यायाधीश दिनेश मेहता की खंडपीठ ने राज्य सरकार की अपीलों को निरस्त करते हुए यह व्यवस्था दी।
राज्य सरकार ने कई आवेदकों के माइनिंग लीज आवेदनों पर लैटर ऑफ इंटेंट तथा प्रोस्पेक्टिव लाइसेंस जारी किए थे, लेकिन उन्हें बिना नोटिस और कारण बताए निरस्त कर दिया था।
इसके खिलाफ आवेदकों ने याचिकाएं दायर की। एकलपीठ ने सभी याचिकाओं में सरकार के आदेश को यह कहते हुए अपास्त कर दिया था कि इसी प्रकृति के दो अन्य मामलों में खंडपीठ पूर्व में ही याचिकाकर्ताओं के पक्ष जैसा निर्णय दे चुकी थी।
एकलपीठ के आदेशों को सरकार ने खंडपीठ में चुनौती दी, जहां सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता संदीप शाह ने कोर्ट को बताया कि एकलपीठ ने खंडपीठ द्वारा निर्णित जिन दो फैसलों को नजीर बनाया है, उसे सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका के माध्यम से चुनौती दी गई है और शीर्ष कोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए आदेशों के क्रियान्वयन पर स्थगन आदेश दिया है।
कोर्ट ने कहा कि चूंकि इसी कोर्ट की अन्य खंडपीठ एक विवादित बिंदु पर अपना निर्णय दे चुकी है, इसलिए इस पीठ को अलग नजरिया नहीं अपनाना चाहिए। इस आधार पर अपीलें खारिज करते हुए खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय सभी पक्षों के लिए बाध्यकारी होगा।
कोर्ट ने कहा कि यदि एकलपीठ के आदेश की पालना में अप्रार्थियों द्वारा अवमानना की वैधानिक कार्यवाही प्रारंभ की गई है तो वे इस पर आगे नहीं बढ़ें, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट का स्थगन आदेश प्रभाव में है।
यदि किसी अप्रार्थी ने अवमानना याचिका दायर नहीं की है, तो उसे सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का इंतजार करना होगा।
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/2OQzs7c
0 comments:
Post a Comment