डांगियावास न्यूज़©जोधपुर
भारी बारिश से पालासनी गांव क्षेत्र में बिसलपुर और पालासनी गांव के बीच मीठड़ी नदी पर बने पुल के टूटने से क्षेत्र के 10 गांवो का सम्पर्क जिला मुख्यालय से टूट गया हैं। लगातार बारिश से तीसरे दिन भी यह क्षेत्र तहसील और जिला मुख्यालय से कटा रहा। जिला कलेक्टर के आदेश से दो दिन विद्यालय में अवकाश होने से ये अब से सीधे सोमवार को खुलेगे । अतिवृष्टि के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है शिक्षा, स्वास्थ्य परिवहन एवं मुख्य आम सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही है। शहर से सीधा संपर्क कटने के कारण आपातकालीन में चिकित्सा व्यवस्था के लिए भी लोग चिंतित हैं।
राज्य में मानसून के देरी से आने के कारण एक तो वैसे ही किसानों ने इस बार के खेती लेट की थी और ऊपर से इस भारी अतिवृष्टि ने उनका सब कुछ तबाह कर दिया, जिससे उनके खेत में कुछ होने की आस थी वह भी नदी के पानी के साथ बह गई। नदी के जलस्तर को देखने आए उपस्थित ग्रामीणों में से राधेकृष्ण गहलोत और ओमाराम गोदारा ने बताया कि यह पुल टूटने का सिलसिला कई सालों से चल रहा है प्रशासन लीपापोती के नाम पर केवल नाम मात्र मरम्मत जा कर देता है लेकिन स्थायी समाधान अभी तक नहीं हो पाया है। जिससे मानसून के दौर में हर साल इस समस्या का सामना करना पड़ता
है। गत वर्ष भी नदी पर तेज बहाव के कारण एक व्यक्ति की मौत हो गई थी जो नदी की धारा के साथ ही बह गया था,बाद में प्रशासन,ग्रामीणों और NDRF टीम के सहयोग से उसकी बॉडी को रिकवर किया गया था।स्वास्थ्य, राशन सामग्री को लेकर ग्रामीणों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा । अब तक केवल सार्वजनिक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता को छोड़कर किसी भी अफसर ने हालत का जायजा नहीं लिया है।
ग्राम वासियों की मांग है कि मीठड़ी नदी के ऊपर एक बड़े पुल का निर्माण किया जाए जिससे इस समस्या का हमेशा के लिए समाधान हो जाए और आम जनजीवन अस्त-व्यस्त ना हो।
इन गांवों का संपर्क टूटा
भारी बारिश के कारण पुल के टूटने से पालासनी,खारी कला ,खारी खुर्द रामासनी, लोलावास, गोलिया, मोरटूका बीरडावास ,सेवालो की ढाणी,गोदारों की ढाणी सहित दर्जनों गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से टूट गया।
सोर्स: अभिनव पलासनी
भारी बारिश से पालासनी गांव क्षेत्र में बिसलपुर और पालासनी गांव के बीच मीठड़ी नदी पर बने पुल के टूटने से क्षेत्र के 10 गांवो का सम्पर्क जिला मुख्यालय से टूट गया हैं। लगातार बारिश से तीसरे दिन भी यह क्षेत्र तहसील और जिला मुख्यालय से कटा रहा। जिला कलेक्टर के आदेश से दो दिन विद्यालय में अवकाश होने से ये अब से सीधे सोमवार को खुलेगे । अतिवृष्टि के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है शिक्षा, स्वास्थ्य परिवहन एवं मुख्य आम सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही है। शहर से सीधा संपर्क कटने के कारण आपातकालीन में चिकित्सा व्यवस्था के लिए भी लोग चिंतित हैं।
राज्य में मानसून के देरी से आने के कारण एक तो वैसे ही किसानों ने इस बार के खेती लेट की थी और ऊपर से इस भारी अतिवृष्टि ने उनका सब कुछ तबाह कर दिया, जिससे उनके खेत में कुछ होने की आस थी वह भी नदी के पानी के साथ बह गई। नदी के जलस्तर को देखने आए उपस्थित ग्रामीणों में से राधेकृष्ण गहलोत और ओमाराम गोदारा ने बताया कि यह पुल टूटने का सिलसिला कई सालों से चल रहा है प्रशासन लीपापोती के नाम पर केवल नाम मात्र मरम्मत जा कर देता है लेकिन स्थायी समाधान अभी तक नहीं हो पाया है। जिससे मानसून के दौर में हर साल इस समस्या का सामना करना पड़ता
है। गत वर्ष भी नदी पर तेज बहाव के कारण एक व्यक्ति की मौत हो गई थी जो नदी की धारा के साथ ही बह गया था,बाद में प्रशासन,ग्रामीणों और NDRF टीम के सहयोग से उसकी बॉडी को रिकवर किया गया था।स्वास्थ्य, राशन सामग्री को लेकर ग्रामीणों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा । अब तक केवल सार्वजनिक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता को छोड़कर किसी भी अफसर ने हालत का जायजा नहीं लिया है।
ग्राम वासियों की मांग है कि मीठड़ी नदी के ऊपर एक बड़े पुल का निर्माण किया जाए जिससे इस समस्या का हमेशा के लिए समाधान हो जाए और आम जनजीवन अस्त-व्यस्त ना हो।
इन गांवों का संपर्क टूटा
भारी बारिश के कारण पुल के टूटने से पालासनी,खारी कला ,खारी खुर्द रामासनी, लोलावास, गोलिया, मोरटूका बीरडावास ,सेवालो की ढाणी,गोदारों की ढाणी सहित दर्जनों गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से टूट गया।
सोर्स: अभिनव पलासनी

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