फलोदी (जोधपुर). सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र फलोदी का नाम बदल कर राजकीय चिकित्सालय करने और अस्पताल प्रभारी का पद नाम बदल कर प्रमुख चिकित्सा अधिकारी (पीएमओ) करने में सरकार को 6 वर्ष लग गए लेकिन अभी तक वित्तीय स्वीकृति जारी नहीं होने से चिकित्सालय को कोई लाभ नहीं मिल रहा है।
करीब दो माह पूर्व इसे लेकर प्रशासनिक आदेश जारी होने पर अस्पताल स्टाफ ने खुशी में एक दूसरे का मुंह मीठा करवाया और बधाइयां दीं लेकिन अभी तक वित्तीय स्वीकृति जारी नहीं होने से उनमें निराशा छाने लगी है।
उल्लेखनीय है कि सरकार ने 25 सितंबर 2013 को बजट घोषणा वर्ष 2013-14 के अनुसरण में फलोदी अस्पताल को 100 से 150 बेड किए जाने की प्रशासनिक स्वीकृति जारी की थी। 6 वर्ष बाद उक्त स्वीकृति के फलस्वरूप 7 जुलाई 19 को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग जयपुर ने सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र फलोदी का नाम परिवर्तन कर राजकीय चिकित्सालय करने तथा प्रभारी वरिष्ठ विशेषज्ञ का पदनाम ‘प्रमुख चिकित्सा अधिकारी ’(पीएमओ) किए जाने की प्रशासनिक स्वीकृति जारी की।
इसलिए जरूरी है वित्तीय स्वीकृति
प्रशासनिक स्वीकृति से अस्पताल का दर्जा तो बढ़ गया लेकिन वित्तीय स्वीकृति जारी नहीं होने से न तो अस्पताल में नए पदों का सृजन हुआ और ना ही स्वीकृत पदों के वेतनमान में कोई संशोधन हुआ। वित्तीय स्वीकृति जारी होने पर अस्पताल का बजट हैड चेंज होगा। अस्पताल में 150 बेड की स्वीकृति होने को भी 6 वर्ष हो चुके हैं लेकिन वित्तीय स्वीकृति नहीं होने से बेड भी नहीं बढ़े हैं।
अस्पताल में स्वीकृत और रिक्त पद
सरकारी अस्पताल में चिकित्सकों, नर्सेज व अन्य कुल 112 पद स्वीकृत हैं जिनमें से 63 कार्यरत हैं और 49 पद रिक्त हैं। इनमें कनिष्ठ विशेषज्ञ 1, वरिष्ठ विशेषज्ञ 2, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी 1, चिकित्सा अधिकारी 2, नर्स ग्रेड सैकण्ड 17 और फार्मासिस्ट के 2 पदों के अलावा भी पद रिक्त हैं।
अस्पताल का नाम परिवर्तन और पीएमओ के पद की प्रशासनिक स्वीकृति मिली है लेकिन जब तक वित्तीय स्वीकृति जारी नहीं होती तब तक इसका कोई लाभ नहीं होने वाला। वित्तीय स्वीकृति जारी होगी तब नए पद सृजित होंगे, संसाधनों में वृद्धि होगी। जिससे मरीजों को उपचार में लाभ मिल सकेगा।
-डा. रविन्द्र परमार, पीएमओ राजकीय चिकित्सालय फलोदी
फैक्ट फाइल
ओपीडी- 1000 से 1200 प्रतिदिन
प्रसव- 300 से 350 प्रतिमाह
आपातकालीन सेवाएं- 400 से 450 प्रतिमाह
एक्सरे- 1000 से 1100 प्रतिमाह
ईसीजी- 300 से अधिक प्रतिमाह
सोनोग्राफी- 800 प्रतिमाह
प्रयोगशाला- एक लाख से ज्यादा जांचें प्रति वर्ष
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