जोधपुर. मुस्लिम महिलाओं ( Muslim women ) से जुड़ा तीन तलाक बिल ( Triple Talaq bill ) लोकसभा के बाद राज्यसभा ( Rajya Sabha ) में भी पास हो गया है। हालांकि इस बिल के समर्थन में 99 तो विरोध में 84 वोट पडे़। बिल को सलेक्ट कमेटी में भेजने का विपक्ष का प्रस्ताव 84 के मुकाबले 100 वोटों से गिर गया है। यह बिल पास होने से तीन तलाक मुद्दा फिर से देश और दुनिया की सुर्खियों में छा गया है। राजस्थान पत्रिका ने इस मुद्दे के बारे में भारतीय संविधान, मुस्लिम शरिया कानून,पारिवारिक विधि और सामाजिक दृष्टिकोण के बारे में जानकारी रखने वाले लोगों से बात की। इनमें से अधिकतर अधिवक्ता शामिल रहे,जो न सिर्फ तलाक के केस डील करते हैं, बल्कि जिन्हें कानून के बारे में आम लोगों से ज्यादा जानकारी है। पेश है ट्रिपल तलाक बिल (triple divorce bill ) पर जोधपुर के प्रबुद्ध लोगों के विचार :
अर्थहीन कानून, तलाक पर रोक नहीं
तीन तलाक बिल बनने से पहले और बनने के बाद भी इस विषय पर देश और दुनिया में सभी जगह चर्चा हो रही है। किसी भी बिल पर राय देने के लिए व्यक्ति को उसकी पूरी समझ होना चाहिए। इसके लिए पूरे तथ्य समझने के बाद ही राय देना चाहिए। हो यह रहा है कि जिन्हें इस विषय में पूरी जानकारी नहीं है, या जिन्होंने विधि का अध्ययन नहीं किया है, वे भी कानून समझे बिना राय दे रहे हैं। दरअसल यह अर्थहीन कानून है। तलाक देने पर कोई रोक नहीं लगाई गई है। मात्र एक साथ तीन तलाक कह देने पर रोक लगाई गई है। जिसको पत्नी को तलाक देना होगा, वह एक-एक महीने के अंतर से तीन बार तलाक दे देगा। जो आज भी मुस्लिम विधि में मान्य है।
-हैदर आगा
अधिवक्ता, राजस्थान उच्च न्यायालय,जोधपुर
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मानव कल्याण की दृष्टि से जायज
तीन तलाक न तो पैगम्बर हजरत मोहम्मद की शरियत का हिस्सा है और न ही यह मानव कल्याण की दृष्टि से ही जायज है। यह एकदम असंगत और अव्यावहारिक है। इस कुप्रथा के कारण महिला की जिन्दगी नरक बन जाती है। जो प्रथा महिलाओं के हितों के विपरीत और उन्हें तकलीफ देने वाली हो, वह कुप्रथा तो हर हाल में खत्म होना चाहिए। उसके समर्थन की तो कोई गुंजाइश ही नहीं है। इस बिल के आने से उच्छृंखल प्रवृत्ति के पतियों पर जरूर नकेल कसेगी, लेकिन हां पत्नी के प्रति वफादार पतियों को इससे कोई नुकसान नहीं होगा।
-शन्नो रिजवी
अधिवक्ता, राजस्थान उच्च न्यायालय,जोधपुर
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बिल विधि व मुस्लिम पारिवारिक विधि विरुद्ध
तीन तलाक बिल विधि व मुस्लिम पारिवारिक विधि विरुद्ध है। क्योंकि उक्त तलाक एक उपचार है, जो विशेष परिस्थिति में उपयोग किया जाता है, जिसे हथियार के रूप मे उपयोग नहीं किया जा सकता और ना ही यह चलन में है। तीन तलाक का अर्थ गलत और इस्लाम विरोधी निकाला गया है। क्योंकि इस्लामी आलिमों से कुरान और हदीस की रोशनी में राय नहीं ली गई। उक्त तलाक चरित्र हनन, मृत्युजन्य रोग व बांझ इत्यादि का उपचार है, जो इस्लाम के अनुसार सही है। इस बिल को दंडनीय बनाने से परिवार टूटेंगे और झगड़े बढ़ेंगे। जबकि पारिवारिक विधि सिविल प्रकृति की है, जिसमें पत्नी को तलाक की सूचना अपराध ना हो कर निकाह से आजाद करना है। यह भारतीय संविधान के मूलभूत धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के विपरीत है, जो निरस्त करने योग्य है।
-मोहम्मद तसलीम अब्बासी
राजस्थान उच्च न्यायालय,जोधपुर
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तीन तलाक कानून गलत
मेरे विचार से जो तीन तलाक का कानून पास किया गया है, वह बिल्कुल गलत है। शरियत में जो यह कानून बनाया गया है उसमें उस सूरत में एक साथ तलाक देने के लिए कहा गया है कि यदि बहुत जरूरी हो जाए। जैसे कि अपनी औरत को किसी गैर मर्द के साथ देख लिया या कोई रतिजन्य रोग हो गया हो और साथ रहना एक पल भी उचित नहीं है तब यह तलाक दी जाती है। यह कुरान शरीफ में निंदनीय तरीका बताया गया है। जबकि उचित तरीका तीन माह के दरम्यान तलाक देना सही करार दिया गया है। इसे बहुत ही गलत ढंग से लिया गया है। इसे सही तरीके से समझा नहीं गया है।
-फेमीना जई
-वकील, राजस्थान हाईकोर्ट
जोधपुर
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एक ऐतिहासिक कदम
ट्रिपल तलाक बिल का राज्यसभा में पारित होना एक स्वागत योग्य विकास है। हालांकि यह लंबे समय से है और मुस्लिम महिलाएं लगातार कई वर्षों से इसकी मांग कर रही हैं, लेकिन यह सामान्य महिलाओं द्वारा लैंगिक न्याय के लिए आंदोलन में एक ऐतिहासिक कदम है। पिछले एक दशक के दौरान मुस्लिम महिलाओं ने ट्रिपल तलाक की प्रथा के खिलाफ आवाज बुलंद की। कई महिलाओं ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, वे सार्वजनिक रूप से खुल कर सामने आईं, उन्होंने इस अन्याय को बंद करने की मांग की। महिलाओं ने सरकार और उन लोगों को याद दिलाया, जो अपने संवैधानिक दायित्व के बारे में मुस्लिम महिलाओं सहित सभी महिलाओं को सक्षम बनाने के लिए लैंगिक न्याय की मांग करते हैं।यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि यह कानून लोकसभा और राज्यसभा में एक मत मत से पारित नहीं हुआ।
- सय्यद तसनीम
प्रोफेशनल, वर्र्कि ग वीमन
जोधपुर
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सरकार महिलाओं के हितों के लिए जागरुक
ट्रिपल तलाक बिल लंबे समय से लंबित था और इसे पारित करने में बार-बार रुकावटें आ रही थीं। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस निर्णय का दिल से स्वागत करती हूं कि उन्हें तमाम बाधाओं के बावजूद यह बिल पारित करवाने की राह में आने वाले रोड़ों की परवाह नहीं की। यह बिल लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी पारित होने से महिलाओं ने राहत की सांस ली है। आखिर यह उनके हितों से जुड़ा हुआ मुद्दा जो है। इस फैसले से लगातार 3 बार तलाक-तलाक-तलाक बोल कर इस्लामी शरियत का मखौल उड़ाने वाले अब यह अच्छी तरह जान लें कि सरकार महिलाओं के हितों को लेकर कितनी जागरुक है। हमें खुशी और गर्व है कि अब महिलाओं के अधिकारों का संरक्षण इस्लाम जैसे मजहब में तलाक को एक बुराई के रूप में लिया गया है, जो बात निभाने में है, छोड़ देने में बिल्कुल भी नहीं।
-सानिया एम चिश्ती गृहिणी,प्रतापनगर, जोधपुर
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