मेहरानगढ़ दुखांतिका : पत्रिका फेसबुक पेज पर 89 प्रतिशत लोगों ने कहा सार्वजनिक हो चौपड़ा आयोग की रिपोर्ट

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जोधपुर. साल 2008 में नवरात्र पर्व के पहले दिन मेहरानगढ़ ( mehrangarh fort ) में भगदड़ मचने से 216 लोगों की मौत हो गई थी। हादसे के बाद पुलिस ने एक मर्ग दर्ज किया था और किसी की कोई अन्य रिपोर्ट नहीं ली थी। सरकार ने जांच के लिए जस्टिस जसराज चोपड़ा का अयोग ( Justice Jasraj chopra ) बनाया था। अर्से से इस रिपोर्ट को सार्वजनिक किए जाने की अटकलें लगाई जाती रहीं। वहीं अब गहलोत सरकार ने भी इसे सार्वजनिक करने से मना कर दिया है और हाईकोर्ट ( rajasthan high court ) ने इसे सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत करने को कहा है। लेकिन आमजन में इसे सार्वजनिक किए जाने को लेकर चर्चा है। हालांकि इस मामले में हाईकोर्ट का फैसला ही सर्वमान्य होगा।

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पत्रिका ने फेसबुक के माध्यम से जोधपुर के लोगों से इस संबंध में जब राय मांगी तो अधिकांश लोगों ने उत्तर हां में दिया है। जोधपुर पत्रिका फेसबुक पेज पर करवाए गए एक पोल में 89 प्रतिशत लोगों का कहना है कि रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए। वहीं महज 11 प्रतिशत लोगों ने इसे सार्वजनिक किए जाने का विरोध किया है। उल्लेखनीय है कि राज्य कैबिनेट ने सोमवार को कानून व्यवस्था प्रभावित होने का अंदेशा जताते हुए आयोग की रिपोर्ट को विधानसभा के पटल पर नहीं रखने का निर्णय लिया था।

मेहरानगढ़ दुखांतिका : सरकार ने कहा सार्वजनिक नहीं होगी चौपड़ा आयोग की रिपोर्ट, हाईकोर्ट ने सीलबंद लिफाफे में पेश करने को कहा

मुख्य न्यायाधीश एस.रविंद्र भट्ट तथा न्यायाधीश डा.पुष्पेंद्रसिंह भाटी की खंडपीठ में मेहरानगढ़ दुखांतिका संघर्ष समिति के सचिव मानाराम की ओर से दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान मंगलवार को महाधिवक्ता महेन्द्र सिंह सिंघवी ने कोर्ट को बताया कि राज्य कैबिनेट ने दो कैबिनेट सब कमेटी की रिपोर्ट में की गई सिफारिशों के आधार पर आयोग की रिपोर्ट को विधानसभा के पटल पर नहीं रखने का निर्णय लिया है। इसके किसी भी अंश को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। इस पर खंडपीठ ने आयोग की रिपोर्ट व सब कमेटी की सिफारिश को सीलबंद लिफाफे में कोर्ट के समक्ष पेश करने को कहा और अगली सुनवाई 2 सितंबर नियत की।

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1500 दिन चली थी कार्यवाही

हादसे के बाद तत्कालीन एसपी-कलक्टर के तबादले किए गए। इसके बाद आयोग की कार्यवाही लगभग 1500 दिन चली थी। 222 पीडि़तों और 59 अफसरों के बयान लिए थे। प्रदेश के सभी मंदिरों का दौरा किया गया था। यात्राओं पर 3.23 लाख, वेतन पर 105.27लाख, चिकित्सा पर 1.75लाख, गाडिय़ों के किराए पर 18.60 लाख और रॉयल्टी के 32.93 लाख मिलाकर कुल दो करोड़ रुपए खर्च हुए थे।



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