आइआइटी ने खोजी ब्रेन कैंसर की जीन!

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जोधपुर. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) जोधपुर ने मस्तिष्क में सबसे अधिक पाए जाने वाले ग्लियोब्लास्टोमा कैंसर से संबंधित एक नई जीन की खोज की है। एनएलआरपी-12 नामक यह जीन ग्लियोब्लास्टोमा कोशिकाओं में बहुतायात में पाई गई है। यह जीन ट्यूमर को किस हद तक प्रभावित करती है, अब इस पर शोध किया जाएगा ताकि ग्लियोब्लास्टोमा का स्थाई इलाज किया जा सके। इस बीमारी का वर्तमान में पुख्ता इलाज नहीं है। सर्जरी या रेडिएशन थैरेपी के बाद मरीज अधिकतम डेढ़ साल तक ही जीवित रह सकता है। आइआटी के इस शोध को अंतरराष्ट्रीय विज्ञान पत्रिका नेचर ने प्रकाशित किया है।

 

केंद्रीय विज्ञान एवं तकनीकी विभाग और बायोटेक्नोजी विभाग की ओर से वित्त पोषित इस शोध में आइआइटी के साथ मुंबई स्थित टाटा मैमोरियल हॉस्पिटल भी शामिल था। आइआइटी के बायोसाइंस व बायोइंजीनियरिंग विभाग की डॉ. सुष्मिता झा ने अपने साथियों के साथ प्रयोगशाला में मानव मस्तिष्क की कोशिकाओं का संवद्र्धन किया। इसके बाद टाटा मैमोरियल हॉस्पिटल ने ग्लियोमा ट्यूमर की कोशिकाओं को सुष्मिता को भेजा। ट्यूमर कोशिकाओं को भी प्रयोगशाला में संवद्र्धित कर अध्ययन किया गया। स्वस्थ व बीमार कोशिकाओं के अध्ययन में सामने आया कि ट्यूमर कोशिका में एनएलआरपी-12 जीन की बहुत अधिक मात्रा पाई गई। डॉ. झा ने बताया कि यह जीन ब्रेन ट्यूमर में बहुत बड़ी भूमिका निभा रहा है। कोशिका विभाजन के साथ जीन की मात्रा भी बढ़ती जा रही है। अब जीन से संबंधित शोध किया जाएगा। शोध टीम में आइआइटी की डॉ. सुष्मिता पॉल, टाटा हॉस्पिटल से डॉ. एप्री श्रीधर, पीएचडी विद्यार्थी डॉ. निधि शर्मा, शालिनी सिंह, शिवांजलि सक्सेना, इशान अग्रवाल, एमटैक विद्यार्थी वर्षा श्रीनिवासन, श्वेता व अरविंद शामिल थे।

कैंसर स्पेसिफिक इलाज की कवायद
डॉ. झा ने बताया कि वर्तमान में कैंसर के संबंध में अधिकांश शोध विदेशी जनता पर हुए हैं और बीमारी के डाटा भी उसी अनुरुप है। भारत में कैंसर को लेकर रोगियों पर अधिक शोध नहीं हुआ है। डॉक्टर भी पर्सन स्पेसिफिक इलाज नहीं देते हैं जबकि दो व्यक्तियों में कैंसर भिन्न-भिन्न होता है। नई जीन की पहचान से कैंसर के इलाज में मदद मिलने की उम्मीद है।

हर दूसरे दिन ट्यूमर का ऑपरेशन

डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के अधीन मथुरादास माथुर अस्पताल के न्यूरो सर्जरी विभाग में हर दूसरे दिन ट्यूमर का ऑपरेशन होता है। सर्वाधिक ग्लियोमा से ग्रसित रोगी अस्पताल पहुंचते हैं। अस्पताल के न्यूरो सर्जन डॉ. सुनील गर्ग कहते हैं कि ग्लियोमा होने का अभी तक कोई पुख्ता कारण ज्ञात नहीं है क्योंकि ब्रेन ट्यूमर पर अधिक शोध नहीं हुआ है लेकिन रेडिएशन सहित अनेक कारक है, जिसके चलते मस्तिष्क की कोशिकाओं में ग्लियोमा ट्यूमर बन जाता है।

 



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