आप की गाड़ी में पेट्रोल के साथ एल्कोहल भी है

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जोधपुर. राजस्थान में तीन साल बाद फिर से एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की बिक्री शुरू हो गई है। तीनों सरकारी तेल कम्पनियों के पेट्रोल पम्पों पर अप्रेल से पेट्रोल 10 प्रतिशत एथेनॉल के साथ बेचा रहा है। यह पहली बार है कि प्रदेश में 10 प्रतिशत बायोफ्यूल ईंधन का उपयोग किया जा रहा है जबकि शेष भारत में इस साल 7.2 प्रतिशत बायोफ्यूल मिश्रित ईंधन का लक्ष्य रखा गया है।
राजस्थान में तेल कम्पनियों इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने इसके लिए उत्तरप्रदेश के गन्ना उत्पादकों से चार महीने का करीब 2700 किलोलीटर एथेनॉल खरीद का समझौता किया है यानी मानसून तक पेट्रोल पंपों पर एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल मिलेगा। इससे गाड़ी के पावर पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा लेकिन तेल कम्पनियों के आयात बिल में कमी आएगी।

केंद्र सरकार ने वर्ष 2009 में बायो फ्यूल पॉलिसी जारी की थी। जिसके बाद 2013 में अधिकतम 5 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की बिक्री शुरू की गई, लेकिन एथेनॉल उत्पादन कम होने से इस लक्ष्य को प्राप्त नहीं किया जा सका। राजस्थान में 2015-16 में कुछ समय के लिए पांच प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल बेचा गया मगर एथेनॉल आपूर्ति लडख़ड़ाने से इसे बंद करना पड़ा। केंद्र सरकार वर्ष 2018 से अधिक उत्पादन का लक्ष्य लेकर चल रही है। गत वर्ष रिकॉर्ड 140 करोड़ लीटर एथेनॉल उत्पादित हुआ। इस साल गन्ना उत्पादक राज्यों उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, गोआ, बिहार, गुजरात व हरियाणा को 237 करोड़ लीटर करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार 2030 तक 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का लक्ष्य लेकर चल रही है। देश की जरुरत का 80 प्रतिशत कच्चा तेल आयात किया जाता है, जिसका आयात बिल 7 लाख करोड़ रुपए है।

उत्तरप्रदेश से आ रहे हैं ट्रक, टर्मिनल में मिलाते हैं
देश में सर्वाधिक गन्ना उत्तरप्रदेश में होता है। वर्तमान में वहां दूसरे राज्यों द्वारा एथेनॉल खरीद पर 2 रुपए लेवी लगती है। तेल कम्पनियों को 52.43 रुपए प्रति लीटर एल्कोहल मिल रहा है। शुगर मिल एसोसिएशन से प्रतिदिन एल्कोहल की ट्रकें राजस्थान आ रही है। एल्कोहल को तेल कम्पनियों के टर्मिनल पर पेट्रोल में मिश्रित किया जाता है। उसके बाद पंपों पर आपूर्ति हो रही है।

जुलाई तक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल मिलेगा
‘हम 10 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल दे रहे हैं। इसकी उपलब्धता 4 महीने तक रहेगी। तेल कम्पनी की प्रयोगशाला में टेस्ट किया गया है कि इससे गाड़ी के इंजन के स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ रहा है।

आर. कुमार, महाप्रबंधक, इंडियन ऑयल सालावास टर्मिनल जोधपुर

 



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