धुंधाड़ा/आगोलाई. तेज गर्मी का असर आमजन के साथ ही अब वन्यजीवों पर भी देखा जा रहा है। तालाब, नाडी और खेलियां सूखी होने के कारण वन्यजीव पानी की तलाश में आबादी क्षेत्र में आने लगे है। इस दौरान वे आवारा श्वानों के चंगुल में फंस जाते है। उनसे बच जाए तो पानी नहीं मिलने से बेहाल हो जाते है। ऐसे में ज्यादातार को मौत का सामना करना पड़ रहा है।
ऐसी ही एक घटना में गंगाराम मेमोरियल विद्यालय उत्तेसर के खेल मैदान में विचरण के लिए आया हिरण शुक्रवार सुबह विद्यालय खुलने के समय मृत पाया गया। वहीं शुक्रवार सुबह को आगोलाई सार्वजनिक तालाब पर पानी की तलाश में पहुचे नीलगाय के झुंड को तालाब में पानी तो मिला परन्तु पहले से घात लगाकर बैठे आवारा श्वानों के झुंड से मुकाबला करना पड़ा। श्वानों ने नीलगाय के दो बच्चों को बुरी तरह घायल कर दिया। जिसमें एक बच्चे की थोड़ी देर बाद मौत हो गई तथा नीलगाय के दूसरे घायल बच्चें को नरेगा मजदूर तेजाराम आचारी व अन्य ने संभाल कर वनविभाग की रेस्क्यू टीम को सूचित किया। पिछले एक महिने में आगोलाई क्षेत्र में नीलगाय, हिरण, मोर आदि सैकड़ों की संख्या में श्वानों का शिकार बन चुके हैं। इनमें अधिकाश वन्यजीवों का समय पर रेस्क्यू व उपचार नही मिलने पर मौत हो जाती हैं। पिछले तीन दिनों में वन्यजावों के आवारा श्वानों के हमले की दर्जन भर घटनाएं हो चुकी हैं ।
गंगाराम मेमोरियल विद्यालय उत्तेसर के आस-पास के ग्रामीणों ने बताया कि मारवाड़ में भीषण गर्मी से वन्य जीव पानी की तलाश में रात के समय गांवो में आते हैं। गांव में पानी का हौद, तालाब, खेलियों में पानी के संकट से हर रोज वन्य जीव प्यासे मर जाते हैं। ग्रामीणों का मानना है कि यह हिरण भी पानी की तलाश में आया था। पानी के अभाव में हिरण की मृत्यु हो गई। बाद में ग्रामीणों ने वन विभाग से सम्पर्क कर हिरण को मिट्टी में दफनाया। इस दौरान ओमप्रकाश सियाग, हितेश द्विवेदी, युगेश द्विवेदी, वागाराम पटेल पटेल, लादूराम वन्दन, शिवाराम डूडी ने हिरण को दफनाने में मदद की।
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