राज्य के मॉडल पुलिस स्टेशन में एसीबी को देख थानेदार छत पर भागा, रुपए फेंके

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जोधपुर.
राज्य के मॉडल् पुलिस स्टेशन के थानेदार (एसआइ) को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने शुक्रवार शाम २० हजार रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। थानेदार गजेन्द्रसिंह चारण ने मासिक बंधी न देने पर बजरी से भरा डम्पर व एस्कॉर्ट कर रही बोलेरो जब्त करने के बाद ४५ हजार रुपए मांगे थे। रिश्वत लेते ही एसीबी अफसरों को देख एसआइ भाग कर थाने की छत पर जा चढ़ा और रिश्वत राशि फेंक दी। लेकिन एसीबी ने रिश्वत राशि भी बरामद कर ली। इस मामले में थानाधिकारी संजय बोथरा और एक हेड कांस्टेबल की भूमिका भी सामने आई है। ब्यूरो के उप महानिरीक्षक सवाईसिंह गोदारा के अनुसार धिंगाणा निवासी श्रवणराम बिश्नोई की शिकायत पर एसआइ गजेन्द्रसिंह चारण पुत्र माणकसिंह को गिरफ्तार किया गया। चारण रोहट (पाली) थानान्तर्गत दानासनी गांव का रहने वाला है। पुलिस ने गत बुधवार को श्रवणराम का बजरी से भरा डम्पर व एस्कॉर्ट कर रही बोलेरो जब्त कर चार लोगों को गिरफ्तार किया था। इस मामले में मदद और बजरी परिवहन के लिए मासिक बंधी के नाम पर एसआइ ने ४५ हजार रुपए मांगे थे। श्रवणराम ने एसीबी को शिकायत कर दी। गोपनीय सत्यापन में इसकी पुष्टि हो गई। एसीबी को देख थाने की छत पर भागा, रुपए फेंके

श्रवण ने एसआइ को बताया कि उसके पास सिर्फ बीस हजार रुपए हैं। इस पर वह फिलहाल बीस हजार रुपए लेने को तैयार हो गया। रिश्वत राशि लेने के लिए एसआइ ने परिवादी को पहले केबीएचबी में अपने पड़ोसी मित्र को देने को कहा। फिर उसे बासनी थाने बुला लिया। वहां पहुंचकर श्रवण ने एसआइ को बीस हजार रुपए देते ही एसीबी थाने पहुंच गई। यह देख एसआइ भाग कर थाने की छत पर चला गया और रुपए नीचे फेंक दिए। लेकिन ब्यूरो के एएसपी डॉ. दुर्गसिंह राजपुरोहित व नरेन्द्र चौधरी ने एसआइ को पकड़ दो गवाहों की मौजूदगी में रुपए बरामद किए। एसआइ के हाथ धुलवाने पर बाएं हाथ पर रंग लगा मिल गया। एसीबी के एएसपी के अनुसार गत बुधवार सुबह पाली रोड पर निजी कार में सवार बासनी थानाधिकारी संजय बोथरा व हेड कांस्टेबल तेजाराम ने श्रवणराम का बजरी का डम्पर व एस्कॉर्ट कर रही बोलेरो जब्त की थी। लेकिन कागजी कार्रवाई एसआइ चारण से कराई। एसीबी ने सम्बंधित पत्रावली भी जब्त की है।
एक-दो दिन में तय होनी थी मंथली

ब्यूरो के अनुसार डम्पर व बोलेरो के साथ पकड़े गए आरोपियों के साथ पुलिस ने थाने में मारपीट कर दस हजार रुपए लिए थे। इसके बाद भी थानेदार एफआइआर दर्ज करने और मंथली तय करने का कहकर निकल गए थे। एक-दो दिन में बजरी परिवहन की मासिक बंधी तय होनी थी।
‘फ्री में नहीं होता काम’

गोपनीय सत्यापन में हेड कांस्टेबल तेजाराम ने रिश्वत के बारे में परिवादी से कहा कि सीधे अफसर के पास जाओ। जबकि एसआइ चारण ने कहा कि सीआइ का काम सीआइ जाने। मेरी पत्रावली में मैं ही मदद करूंगा, लेकिन काम फ्री में थोड़े ही होता है।

सीआइ की भूमिका की जांच जारी है
‘रिश्वत मामले में थानाधिकारी की भूमिका के बारे में पूछताछ व अनुसंधान जारी है।’

सवाईसिंह गोदारा, उप महानिरीक्षक, एसीबी जोधपुर।



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