जोधपुर. स्कूलों में मिड डे मील की रसोई की अब सूरत सुधरेगी। भारत सरकार ने मिड डे मील को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जिसके तहत अब मेन्यू के साथ-साथ रसोईघर की डिजाइन व नामांकन के आधार पर विद्यालयों में बर्तन का क्रय होगा। कुक कम हैल्पर के स्वास्थ्य आदि की जांच आदि कार्य भी जिला स्तर पर सरकार की सहमति से निर्णित किए जा सकेंगे। इस संबंध में स्कूल एवं भाषा विभाग के प्रमुख शासन सचिव व मिड डे मील आयुक्त ने भी आदेश जारी कर दिए हैं।
पांच वर्ष पुराने बर्तन बदलने के लिए 50 छात्र नामांकन तक 10 हजार रुपए, 51 से 150 तक 15 हजार और 251 और ऊपर तक नामांकन के लिए 25 हजार राज्य सरकार देगी। इन दरों के लिए केन्द्र व राज्य सरकार का अंशदान 60:40 रखा रहेगा। 10 साल पुरानी बनी रसोई के मरम्मत के लिए भी प्रत्येक रसोई घर के लिए 10 हजार रुपए की राशि निर्धारित की है। उल्लेखनीय है कि मिड डे मील के तहत सरकारी स्कूलों में कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को पोषाहार खिलाया जाता है। इसके तहत शहर की स्कूलों व नजदीक गांवों की स्कूलों में मिड डे मील सेंट्रल किचन से बनकर जाता है। दूरदराज गांवों की स्कूलों में रसोई के जरिए मिड डे मील बनाया जाता है। सरकार की ओर से अन्नपूर्णा दूध योजना प्रोजेक्ट भी चल रहा है। राजस्थान शिक्षक एवं पंचायतीराज कर्मचारी संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष लक्ष्मणदान चारण ने बताया कि इस निर्णय के बाद काफी हद तक व्यवस्था सुधारने में स्कूलों को राहत मिलेगी। अब कुक कम हैल्पर का भी मानदेय बढ़ाया जाना चाहिए।
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