जोधपुर. साहित्य की दुनिया का प्रत्येक व्यक्ति आलोचक है । चाहे वह पाठक,प्रकाशक, कार्यक्रम संचालक, कार्यक्रम में भाग लेने वाले अथवा कवि और आलोचक हो। भले ही आपने कभी आलोचना नहीं लिखी हो फि र भी आप आलोचक हो। आप पुस्तकालय, किताब की दुकान में जाते हैं जहां कई किताबें हैं। उनमें से आप एक किताब उठाते हैं तो वहां आप चयन करते हो तो वहां आप आलोचक हो जाते हो। ये विचार गांधी भवन में अंतर प्रांतीय कुमार साहित्य परिषद के तत्वावधान में आयोजित ‘लेखक से मिलिए’ कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रोफेसर रामबक्ष जाट ने व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि मान लीजिए आपने किसी साहित्यकार को पढ़ा। पढऩे से पहले आपकी कुछ अपेक्षाएं थी। कोई रचना आपको बहुत अच्छी लगी। आप मन ही मन वाह कह देते हैं। कहीं लिखा नहीं बस कह दिया। यहीं से आपने आलोचक का दायित्व ओढ़ लिया। परिषद के अध्यक्ष मोहनकृष्ण बोहरा ने कहा कि अच्छा आलोचक वो है जो रचना पर विश्वास करता है रचनाकार पर नहीं। रचनाकार जो आज कहता है वह कल बदल भी सकता है लेकिन रचना का सत्य वही रहेगा। रचना के सत्य को पाने के लिए आलोचक को खाली हाथ रचनाकार के पास जाना चाहिए। अर्थात अपने पूर्वजों को छोडकऱ रचना को पढ़े।
परिषद की महामंत्री डॉ पद्मजा शर्मा ने बताया कि कार्यक्रम के ‘प्रश्नोत्तर सत्र’ में मुरलीधर वैष्णव, डॉ छोटाराम कुम्हार, दशरथ सोलंकी, डॉ प्रमोद कुमार शाह, शुभम पांडे आदि के प्रश्नों के जवाब प्रो. रामबक्ष जाट ने दिए । कार्यक्रम में डॉ सत्यनारायण, हबीब कैफ ी, मिठेश निर्मोही, डॉ भावेन्द्र शरद जैन, हरिप्रकाश राठी, सुषमा चौहान, डॉ किशोरीलाल रेगर, प्रो. कैलाश कौशल, प्रो. सरोज कौशल, डॉ सुमन बिस्सा, डॉ एफ एस भाटी, हितेश व्यास, संतोष चौधरी, कमलेश तिवारी, मधुर परिहार, संध्या शुक्ला सहित कई साहित्यकार उपस्थित थे । कार्र्यक्रम का संयोजन डॉ कालूराम परिहार और डॉ हरीदास व्यास ने आभार व्यक्त किया।
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