अभिषेक बिस्सा/जोधपुर. दिल्ली में चांदनी चौक है तो मुंबई में अंधेरी वेस्ट। वहीं जोधपुर में है ‘अंधारो री गली’। यानी अंधेरी गली। ये गली भीतरी शहर में इश्किया गणेश मंदिर से नायों का बड़ जाने वाले मार्ग पर आसोप की पोल के सामने बिल्कुल बायीं तरफ पड़ती है। इस गली में सारे मकान एक-दूसरे से इतने सटे हुए हैं कि सूर्य की रोशनी गली में नहीं पड़ती। इस कारण इस जगह का नाम अंधारों की गली पड़ गया। नाम मुताबिक इस गली में दिन में भी अंधेरा ही छाया रहता है। गर्मी में लोग अक्सर इस गली में ठंडक के लिहाज से भी खड़े हो जाते हैं। चूंकि यहां धूप नहीं आती, इसलिए गली शीतल भी रहती है।
पुराने जमाने में विशेषकर व्यास पार्क चढऩे व धूप से बचाव के लिए लोग अंधारों की गली से आना-जाना करते थे। हालांकि उस जमाने में महापुरुषों के नाम पर मोहल्ले का नाम रखने का ट्रेंड नहीं था। जिसके चलते उस स्थान की स्थिति के आधार पर जगह का नाम पड़ता था। क्षेत्रवासी मधु लूंकड़ ने बताया कि गली में पुराने मकानों के छज्जे आपस में एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। इस कारण गली में हर वक्त अंधेरा छाया रहता है। इस गली का नामकरण सैकड़ों वर्ष पहले हुआ था। जगह की स्थिति के आधार पर अंधारो री गली नाम पड़ा।
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