जोधपुर.
लोकसभा चुनाव में मतदान दिवस पर 44.7 डिग्री तापमान के बावजूद हर वर्ग के लोगों ने उत्साह के साथ 68 सालों में पहली बार 68.4 प्रतिशत मतदान कर नया रिकॉर्ड बनाया। गत चुनाव की तुलना में 6 प्रतिशत मतदान की बढ़ोतरी में जोधपुर निर्वाचन टीम के कई नवाचार के साथ चार महीनों की मेहनत है। इसके लिए विधानसभा चुनाव के बाद मतदाता सूची में 48 हजार 254 नए मतदाताओं के नाम जोड़े गए। स्वीप अभियान में 12.69 लाख मतदाताओं से मॉक पॉल, द्विव्यांग मतदाताओं को मतदान केंद्र लाने की व्यवस्था, आदर्श, महिला मतदान केंद्र, प्रत्येक मतदान केंद्र पर पानी, छाया की व्यवस्था की गई। इसके लिए जिला निर्वाचन अधिकारी के नेतृत्व में 10 एआरओ सहित 30 कर्मचारियों की टीम ने दो माह तक बिना छुट्टी के राजकीय अवकाश के दिन भी काम किया।
मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए टीम के चार नवाचार
जोधपुर निर्वाचन टीम ने मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए चार नवाचार किए। इनमें से चुनाव से पहले जिले के आधे मतदाताओं को मॉक पोल से मतदान, द्विव्यांगों को मतदान केंद्र तक लाने के लिए सहायक व वाहनों की व्यवस्था, पानी व छाया के लिए अलग से बजट और मतदानदलों को एक ही काउंटर से मतदान सामग्री वितरित की गई।
चुनाव से पहले 12.69 लाख वोटर ने मॉक पोल किया
लोकसभा चुनाव की 10 मार्च को आचार संहिता लगने के बाद स्वीप प्रभारी अंशदीप, अधीक्षण अभियंता गजेंद्र चावला, बीएलओ की टीम ने मतदाता जागरूकता अभियान शुरू कर दिया। 12 मार्च से 26 अप्रेल तक जिले के 12.69 लाख मतदाताओं से मॉक पोल करवा कर उन्हें मतदान प्रक्रिया समझाई गई। खासकर युवा व महिला मतदाताओं को मॉक पोल मतदान करवा जागरूक किया गया।
द्विव्यांगों के लिए 4590 सहायक
द्विव्यांगों को मतदान केंद्र तक लाने के लिए 4590 सहायकों को लगाया गया। इसके लिए सहायकों को एक दिन के 150 रुपए का भुगतान किया। इसके साथ द्विव्यांगों को मतदान केंद्र तक लाने के लिए अलग से व्यवस्था की गई।
पानी व छाया कीे व्यवस्था
मतदान के दिन 44.7 डिग्री तापमान था। गर्मी से मतदाता परेशान न हो इसके लिए शहर में नगर निगम और ग्रामीण क्षेत्र में बीएलओ को पानी के लिए प्रति मतदान केंद्र 500 रुपए और छाया के लिए 1 हजार रुपए दिए गए।
अलवर की तर्ज पर मतदान दलों की रवानगी
जिला निर्वाचन अधिकारी प्रकाश राजपुरोहित ने 14 हजार कर्मचारियों के मतदान दलों की रवानगी और मतदान के बाद मतदान सामग्री जमा कराने के लिए
नया प्रयोग किया। मतदान दलों को रवाना होते समय इवीएम, वीवीपेट, अमिट स्याही सहित अन्य मतदान सामग्री लेने के लिए 6 अलग-अलग काउंटर से मतदान सामग्री लेनी होती थी। इसी प्रकार मतदान सामग्री जमा कराते थे। मतदान चुनाव से एक दिन पहले रवाना होते थे। मतदान करवाने के बाद मतदान सामग्री जमा कराने में उन्हें 48 घंटे लगते थे। इस बार नवाचार करते हुए मतदान दलों के एक ही काउंटर पर मतदान सामग्री वितरित करने और जमा करने की व्यवस्था की गई। इससे मतदान दल 41 घंटों में मतदान करवा कर समय पर घर पहुंच गए। यह प्रयोग जिला निर्वाचन अधिकारी ने अलवर में किया था, जिसके सफल होने पर इस बार जोधपुर में किया गया।
महज दो माह में 48 हजार मतदाताओं के नाम जोड़े
प्रशासनिक सहायक अधिकारी सम्पत सिंह भाटी, सूचना साहयक हिमांशु, विमलेश कल्ला की टीम ने करीब पांच माह पूर्व विधानसभा चुनाव के बाद निर्वाचन विभाग ने मतदाता सूची में संशोधन का अभियान चलाकर नए नाम जोड़े गए। इसके लिए बीएलओ को घर-घर भेजा गया। महज दो माह में 48 हजार 254 नए मतदाताओं के नाम जुड़े। इनमें से 30 हजार युवा मतदाता हैं।
सतरंगी सप्ताह जागरूकता अभियान
जिले के शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में मतदाताओं को जागरूक करने के लिए वोट बारात, मानव श्रृंखला, दीपदान, विद्यार्थियों से मतदान के संकल्प फॉर्म, वाहन, साइकिल रैली जैसे कई अभियान चलाए गए। इसके साथ मंदिर, मस्जिद, स्कूल, कॉलेज में इवीएम व वीवीपेट से मतदान की प्रक्रिया समझाने के लिए शिविर लगाए गए।
350 से ज्यादा शिकायतों का निस्तारण
एडीएम महिपाल भारद्वाज, वरिष्ठ सहायक किशनदास वैष्णव की टीम ने चुनाव के दौरान सीविजल, आचार संहिता के उल्लंघन की करीब 50 से ज्यादा शिकायतों का निस्तारण किया। इसके लिए दोनों कंट्रोल रूम में 24 घंटे कर्मचारी उपस्थित रहते थे। इसके साथ 1950 व चुनाव कंट्रोल रूम में 300 से ज्यादा शिकायतों का निस्तारण किया गया। इधर एमसीएमसी टीम के साक्षी पुरोहित, प्रमोद सिंघल की टीम ने दो दर्जन से ज्यादा मामलों का निस्तारण किया।
दो माह तक छुट्टी के दिन भी काम किया
जिला निर्वाचन अधिकारी प्रकाश राजपुरोहित के नेतृत्व में उप जिला निर्वाचन अधिकारी एमएल नेहरा, एआरओ महिपाल भारद्वाज, सीमा कविया, सुमित्रा पारिक, पुष्पाकंवर, राजेंद्र सिंह चारण, महावीर सिंह, राजेंद्र सिंह डांगा। इसके साथ विभिन्न व्यवस्थाओं के प्रभारी अधिकारी गौरव गोयल, दलवीर सिंह, सोहनाल शर्मा, ओपी बुनकर, अयुब खान, मांगीलाल चौधरी, मीनाक्षी चौधरी, अरविंद जाखड़, मंगलाराम पूनिया, हनुमान सिंह गहलोत, देवाराम सुथार, रवि माथुर की टीम ने दो माह तक छुट्टी के दिन भी काम किया।
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