नंदकिशोर सारस्वत/जोधपुर. ग्रीष्मकाल में प्राकृतिक जलस्रोत सूखने के बाद खुले मैदानों में स्वच्छंद विचरण करने वाले 30 हजार से अधिक चिंकारे-ब्लेक बक, रोजड़ों, सियार, भेडि़ए आदि वन्यजीवों के लिए वन विभाग के वन्यजीव प्रभाग जोधपुर को आवंटित सरकारी बजट ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ कहावत को चरितार्थ कर रहा है। जोधपुर जिले के 100 से अधिक वन्यजीव बहुल क्षेत्रों में पानी का संकट है, लेकिन वन विभाग के अधिकारियों ने जिले के समस्त वन्यजीव बहुल क्षेत्रों में परम्परागत जलाशयों-टांकों व तालाबों में पानी की स्थिति के बारे में आकलन के बाद मात्र 37 स्थानों को चिह्नित किया जिसके लिए छह लाख का बजट सरकार की ओर से आवंटित किया है। दूसरी ओर प्रादेशिक वन मंडल के अधीन जोधपुर जिले की बाप, फलोदी, शेरगढ़, ओसियां, बिलाड़ा व भोपालगढ़ रेंज के 39 वॉटर पॉइंट के लिए आगामी 100 दिनों तक जलापूर्ति के लिए मात्र एक लाख की राशि आवंटित की है।
भामाशाहों का लेंगे सहयोग
वन्यजीव बहुल क्षेत्रों में वन्यजीवों के लिए बनी खेळियों में टैंकर से जलापूर्ति व्यवस्था में सहयोग के इच्छुक भामाशाहों से सहयोग लिया जाएगा। चारे-पानी के अभाव में वन्यजीवों पर किसी तरह का कोई विपरित प्रभाव न पड़े, इसीलिए रेंजर्स को उनके अधीनस्थ वन्यजीव क्षेत्रों के बारे में पाबंद किया गया है। एसीएफ को वन्यजीव बहुल क्षेत्रों का निरीक्षण कर वन्यजीवों के जलापूर्ति व्यवस्था संबंध में समय-समय पर रेंजर्स व उडऩदस्ते से प्रगति रिपोर्ट मांगने को कहा गया है। वन्यजीव बहुल क्षेत्रों में जहां से भी पानी के किल्लत की सूचना होगी वहां टैंकर की व्यवस्था की जाएगी।
महेश चौधरी, उपवन संरक्षक (वन्यजीव ) जोधपुर
आवंटित राशि से ज्यादा खर्च ना हो
राजस्थान के अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक कैम्पा ने आदेश जारी कर प्रदेश के सभी उपवन सरंक्षकों को निर्देश दिए है। जिस जिले में जितनी राशि आवंटित की गई है उससे अधिक खर्च नहीं करें और किसी भी तरह की देनदारियां सृजित नहीं करे। यदि कहीं अतिरिक्त मांग की आवश्यकता हो व्यय राशि और अतिरिक्त मांग का औचित्य दर्शाते हुए मांग पत्र पेश करे।
खेजड़ली क्षेत्र में वन्यजीव भामाशाहों के भरोसे
वन्यजीव बहुल क्षेत्रों में पेयजल संकट वन्यजीवों के लिए जानलेवा साबित होता है। पानी की तलाश में बेजुबां नॉन-प्रोटेक्ट क्षेत्रों से रिहायशी इलाकों में पहुंचने से हिंसक कुत्तों का शिकार बनकर अपनी जान गंवा रहे है। खेजड़ली रेस्क्यू सेंटर में छाया पानी के इंतजाम नहीं होने के कारण क्षेत्र के पर्यावरणप्रेमी अपने स्तर पर ही व्यवस्था में जुटे है। क्षेत्र के श्यामलाल विश्नोई ने बताया कि ‘भामाशाह दानदाता ग्रुप ’ बनाकर लोगों के सहयोग से पानी, खेळियों और उपचार की व्यवस्था की जा रही है। सडक़ पार करते समय तेज रफ्तार वाहन की चपेट में आकर घायल हो जाते है। जिले के ओसियां, फलोदी, भोपालगढ़ बिलाड़ा व जोधपुर के आस पास वन्यजीव बहुल क्षेत्र में अधिकांश तालाब, पानी के टांके, नाडे-नाडियां, खेळियां सूखी पड़ी है।
ऊंट के मुंह में जीरे के समान
वन्य जीवों के पानी की व्यवस्था के लिए जोधपुर जिले के हजारों वन्यजीवों के लिए 6 लाख का बजट और 37 स्थलों का निर्धारण ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। वनविभाग की ओर से चिह्नित स्थानों के अलावा अधिकांश वन्यजीव बहुल क्षेत्रों की अनदेखी की गई है।
रामनिवास बुधनगर, वन्यजीव प्रेमी जोधपुर
वन्यजीवों क्षेत्रों में अभी तक नहीं पहुंचा टैंकर
जिले के प्राकृतिक जलस्रोत सूखे दो माह हो चुके हैं। वन्यजीव पानी की तलाश में बैमोत मारे जा रहे हैं। सरकार ने बजट के नाम पर वन विभाग के वन्यजीव मंडल और प्रादेशिक मंडल को नाममात्र बजट दिया है। वन विभाग की राशि आवंटन में असमानता के चलते टेंडर प्रक्रिया अधूरी पडी है। ग्रामीण क्षेत्रों में वन विभाग का एक भी पानी का टैंकर नहीं पहुंचा है। वन्यजीवों के पानी पिलाने के लिए क्षेत्रीय भामाशाहों और हमारे संस्था के स्वयंसेवक सेवाएं दे रहे हैं। खेजडली,जाजीवाल विश्नोईया, गुडा विश्नोईया, लूणी, जालैली फ ौजदार, भवाद, रामडावास, फींच आदि क्षेत्रों के वन्यजीव बहुल इलाकों में पानी की समस्या है।
-रामपाल भवाद, प्रदेशाध्यक्ष विश्नोई टाईगर्स वन्य एवं पर्यावरण संस्था
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