जोधपुर. सोशल मीडिया के बढ़ते दौर में बच्चे दादी-नानी की कहानियों के संसार से दूर होते जा रहे हैं। कहने को तो यह आधुनिक दौर है लेकिन इससे विसंगितयां बढऩे लगी हैं। आज टेल अ स्टोरी डे के अवसर पर व्यास पार्क खागल निवासी 72 वर्षीय मुन्नी पुरोहित शहर के भीतरी क्षेत्र के बीते दौर को स्मरण करते हुए कहती हैं कि हथाइयों के लिए प्रसिद्ध सूर्यनगरी में एक समय ऐसा भी था, जब मोहल्ले के बच्चे अपने क्षेत्र के बुजुर्गों के साए में न सिर्फ कहानी-कविता सुनते थे बल्कि शहर से जुड़ी संस्कृति, परंपराओं और कहावतों से भी अवगत हुआ करते थे। समय के साथ यह बीते दौर की बातें हो चली हैं। उन्होंने बताया कि मोबाइल फोन के आने से पहले तक नाती-पोते नियमित तौर पर कहानियां सुनते थे।
मुन्नी पुरोहित बताती हैं कि पुराने लोगों में जुड़ाव था और संयुक्त परिवार होने से बच्चों में भी अपनापन होता था लेकिन आज एकल परिवार बढऩे से रिश्तों में दूरियां बढऩे के साथ पढ़ाई और ट्यूशन के चलते भी बच्चों के पास दादी-नानियों के पास समय व्यतीत करने का समय नहीं है। उन्होंने बताया कि भीतरी क्षेत्र में बड़े-बुजुर्ग घर के बाहर बैठा करते थे और बच्चे आसपास खेला करते थे। शाम होने पर बच्चे कहानी सुनने बैठ जाया करते थे। उनके श्वसुर किताबें लाकर पे्ररित करते थे यह पढकऱ बच्चों को सुनाई जाए। पुरानी कहानियों को किसने लिखा, किसी को पता नहीं। लेकिन उनसे जीवन जीने की कई सीख मिलती थी। कहानियां सुनने की परंपरा खत्म होने के साथ उन्होंने चि_ी लेखन बंद होने पर भी चिंता जाहिर की।
फेसबुक पर पोस्ट कर रही कविताएं
बदलते दौर के साथ बुजुर्ग भी नई पीढ़ी के साथ कदम मिलाने लगे हैं। मुन्नी पुरोहित अपने नाम से फेसबुक पेज भी संचालित कर रही हैं। इसमें वे अपनी लिखी कविताओं और कहानियों को पोस्ट करती हैं। हालांकि इसे उनके पुत्र संभाल रहे हैं लेकिन मौलिक रचनाएं उनकी ही हैं। पुरोहित कविता लेखन के लिए जयपुर में राज्य स्तरीय सम्मान सहित कई अवॉर्ड से सम्मानित हो चुकी हैं।
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