RAS अधिकारी ने ऑफिस में ली रिश्वत, ACB ने पकड़ा तो बोले - 'बच्चों के कॉलेज की फीस है'

पोस्ट पसंद आये तो लाइक जरुर करे ?

जोधपुर।

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने आरएएस अधिकारी और अतिरिक्त जिला कलक्टर शहर (द्वितीय) विजयसिंह नाहटा को गुरुवार दोपहर दस हजार रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। नाहटा के पास इन दिनों एडीएम तृतीय का भी चार्ज है। यह राशि खेत की पत्थरगढी कराने के लिए तहसीलदार को आदेश जारी करने की एवज में ली गई।

 

नाहटा ने जिला कलक्टर कार्यालय परिसर में अपने ऑफिस में दो लोगों के मौजूदगी में खुलेआम पीडि़त से रिश्वत ली। रंगे हाथ पकड़े जाने के बाद गिरफ्तार नाहटा ने कहा कि यह पैसे तो उसके बच्चों के कॉलेज की फीस के हैं।

 

एसीबी डीआइजी सवाईसिंह गोदारा के अनुसार पीपाड़ शहर के चिरढाणी गांव निवासी पप्पूदास वैष्णव ने लिखित शिकायत दी थी कि एडीएम(शहर) द्वितीय नाहटा ने उसकी गांव में स्थित जमीन पर पत्थरगढी कराने व कब्जा हटाने के लिए तहसीलदार को आदेश देने की एवज में 10 हजार रुपए की रिश्वत मांगी है। इस पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नरेंद्र चौधरी ने टीम के साथ शिकायत का सत्यापन कर गुरुवार दोपहर 3 बजे पप्पूदास को एडीएम तृतीय के ऑफिस भेजा।

 

वहां एडीएम टीम ने नाहटा को 10 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। रिश्वत की राशि उनके कमीज की बांयी जेब से बरामद की गई। ऑफिस में करीब एक घंटे तक कार्यवाही के बाद एक एएसपी दुर्ग ङ्क्षसह राजपुरोहित के नेतृत्व में कांस्टेबल भंवरलाल, दलेश, भूरसिंह, रूपसिंह, राजेन्द्र सिंह व कनिष्ठ लिपिक मेघ सिंह की टीम को नाहटा के चौपासनी हाउसिंग बोर्ड स्थित सेक्टर 17ई स्थित किराए के मकान में तलाशी लेने भेजा गया।

 

पीडि़त पांच साल काट रहा था चक्कर

पप्पूदास के खेत खसरा संख्या 865 की मेड़ पर पड़ोसी चिमनाराम जाट ने वर्ष 2015 से 10-15 फुट अवैध कब्जा कर रखा है। कब्जा हटाने के लिए पप्पूदास पांच साल से विभागों के चक्कर काट रहा था। पीडि़त ने सम्पर्क पोर्टल पर भी शिकायत की थी। गत 6 फरवरी को पुलिस सुरक्षा में जमीन का सीमांकन कराया गया था। जिसमें पड़ोसी के दस फुट कब्जा करने की पुष्टि हुई थी।

 

ACB को देख बोला, बच्चों की फीस के रुपए हैं

रिश्वत लेने के बाद इशारा मिलते ही एसीबी के एएसपी नरेन्द्र चौधरी व डॉ. दुर्ग सिंह राजपुरोहित ने ऑफिस में दबिश दी और नाहटा की कमीज की जेब से रिश्वत के दस हजार रुपए बरामद कर लिए। एडीएम ने कहा कि यह रुपए तो बच्चों की कॉलेज फीस के हैं। ब्यूरो के अफसरों के कहा, नहीं एडीएम साब, यह राशि तो केमिकल लगाकर एसीबी ने ही भेजी है। इसके बाद नाहटा सरेंडर हो गए।

 

ऑफिस में लगा था रिश्वत नहीं लेने का बोर्ड

जिला कलक्टर परिसर में कलक्टर ऑॅफिस के पीछे एडीएम नाहटा का ऑफिस है। लोकसभा चुनाव के कारण नाहटा ने एडीएम तृतीय के ऑफिस में बैठने शुरू कर दिया था। नाहटा के ऑफिस के बाहर रिश्वत नहीं देने और लेने का चेतावनी बोर्ड लगा था।

 

19 साल पहले बने थे आरएएस अधिकारी

एडीएम नाहटा मूलत: बीकानेर में लूणकरनसर तहसील के कालू गांव के रहने वाले हैं। उनका जयपुर में भी मकान है। वो वर्ष 2001 में आरएएस अधिकारी बने थे। नाहटा के तीन भाइयों में से एक अमरीका में डॉक्टर और दो अन्य का आयात-निर्यात का काम हैं।



from Patrika : India's Leading Hindi News Portal http://bit.ly/2Znt2NO
Share on Google Plus

About Atul

This is a short description in the author block about the author. You edit it by entering text in the "Biographical Info" field in the user admin panel.

0 comments:

Post a Comment