Lok Sabha Elections 2019 : चुनावी मैदान में ताल ठोकते हैं मगर जमानत भी नहीं बचा पाते नेताजी

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स्टोरी : अविनाश केवलिया/कार्टून : आर पटेल/जोधपुर. चुनावी रण ( Lok Sabha Elections 2019 ) में कई नेताजी ऐसे हैं जो ताल तो ठोकते हैं लेकिन अपनी जमानत भी नहीं बचा पाते हैं। सात दशक में 1951 से लेकर 2014 तक हुए 16 चुनावों में अब तक दो प्रतिस्पर्धियों के बीच सीधी टक्कर रही है। इसके अलावा महज एक प्रत्याशी ही ऐसा साबित हुआ है जो अपनी जमानत बचाने में कामयाब रहा। इसके अलावा कोई भी इतने वाले हासिल नहीं कर पाया कि अपनी जमानत भी बचा पाया हो।

जोधपुर में संसदीय सीट पर चुनावी घमासान दो प्रतिद्वंदियों के बीच ही होता आया है। इतिहास के पन्नों में झांके तो यह स्पष्ट होता है कि 16 चुनावों में विजेता और निकटतम प्रतिद्वंदी के अलावा महज एक बार 1980 में तीसरे प्रत्याशी ने अपनी जमानत बचाई थी। जमानत बचाने के लिए उस चुनाव में कुल पड़े वोट में एक छठा हिस्सा यानि करीब 17.33 प्रतिशत वोट लेने होते हैं। लेकिन दो प्रमुख प्रत्याशियों के अलावा कोई भी यह आंकड़ा पार नहीं कर पाता।

चुनावी वर्ष ------- कुल प्रत्याशी ----- जमानत जब्त

1951 ----------- 2 -------------- 0
1957 ----------- 3 -------------- 1
1962 ----------- 7 -------------- 5
1967 ----------- 8 -------------- 6
1971 ----------- 5 -------------- 3
1977 ---------- 3 -------------- 1
1980 ---------- 10 ------------- 7
1984 ---------- 18 ------------ 16
1989 ---------- 21 ----------- 19
1991 ---------- 52 ----------- 50
1996 ---------- 40 ---------- 38
1998 ---------- 10 ---------- 8
1999 ---------- 7 ------------ 5
2004 --------- 12 ------------ 10
2009 ---------- 14 ---------- 12
2014 ---------- 13 ---------- 11

कुल ------------ 225 --------- 192

16 चुनाव में 14 महिलाएं
अब तक हुए 16 चुनावों में 14 महिलाओं ने चुनाव लड़ा है। इनमें सबसे पहले 1971 में निर्दलीय के रूप में पूर्व राजपरिवार सदस्य कृष्णा कुमारी ने जीत दर्ज की थी। इसके बाद 13 प्रत्याशी निर्दलीय व अलग-अलग दलों से मैदान में उतरी। 2009 में चंद्रेश कुमारी दूसरी महिला सांसद बनी।

कुछ रोचक तथ्य

- 1951 में पहले चुनाव में महज 2 प्रत्याशी जोधपुर संसदीय क्षेत्र से मैदान में उतरे थे। यह अब तक सबसे कम प्रत्याशियों वाला चुनाव रहा।
- 1991 के लोकसभा चुनाव में जोधपुर सीट से 52 प्रत्याशी मैदान में थे। यह अब इस सीट पर सबसे ज्यादा प्रत्याशी होने का रिकॉर्ड है।
- 1980 के चुनाव में 10 प्रत्याशी मैदान में थे। विजेता और निकटतम प्रतिद्वंदी के अलावा पूनमचंद विश्नोई ही अब तक जमानत बचा पाए हैं।

इस बार यह गणित
- 2019 के चुनाव में जोधपुर सीट से 10 प्रत्याशी मैदान में है। इनमें दो महिलाएं हैं।



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