नेताओं के भाषण का दिमाग कर रहा chemical translation, फैल रही Mob और Heard psychology

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अभिषेक बिस्सा/जोधपुर. लोकसभा चुनाव ( Lok Sabha Elections 2019 ) को लेकर प्रचार अभियान ने जोर पकड़ लिया है। कोई न्याय योजना का गुणगान तो कोई राष्ट्रवाद के मुद्दे पर घेरने का जतन कर रहा है। स्टार प्रचारक शहर-शहर घूम अपनी बात रख मतदाताओं के मन तक दस्तक दे उन्हें रिझाने का जतन कर रहे हैं। मनोचिकित्सकों के अनुसार बड़े नेता हो या अभिनेता, वे ओजस्वी वाणी से आमजन की साइकोलॉजी को गहरा प्रभावित करते हैं। एक ही बात को बार-बार दोहराकर वे आमजन का मानस बदलने की कोशिश करते हैं।


आजकल भाजपा हो या कांग्रेस, दोनों ही पार्टियां आरोप-प्रत्यारोप के शब्द बाण चला रही हैं। इसमें कुछ शब्द भी चुनावी मैदान में उछलते हैं। बड़े नेताओं द्वारा इन शब्दों को बार-बार दोहराने के बाद ठेठ कार्यकर्ता स्तर तक में यह शब्द कई बार बोला जाता है। इससे आम वोटर में हर्ड रिक्एशन (एक ही बात को बार-बार दोहराना) पैदा होता है। जो कहीं न कहीं आमजन के मन को प्रभावित करता है।

अब सोशल मीडिया पर मॉब साइकोलॉजी का असर
गली-मोहल्लों में नारेबाजी के माध्यम से मॉब साइकोलॉजी को प्रभावित किया जाता है। राजनीतिक पार्टियां इसी लिहाज से रैली व जनसंपर्क साधते हैं। इसमें नारे लगाए जाते हैं। इस तरह की नारेबाजी के जरिए कार्यकर्ता व नेता आमजन की मॉब साइकोलॉजी को प्रभावित करते हैं। ताकि लोगों में सकारात्मक व नकारात्मक उत्तेजना आए। इस कारण शरीर में एक अलग केमिकल का रिएक्शन होता है। हालांकि इन दिनों ये मॉब साइकोलॉजी सडक़ से ज्यादा सोशल मीडिया पर देखी जा रही है। इस कारण गैर राजनीतिक लोग भी सोशल मीडिया पर उत्तेजित हो जाते हैं।


मनोचिकित्सकों और समाजशास्त्रियों से जानें चुनाव प्रचार का मनोविज्ञान

1. हर्ड साइकोलॉजी से पनपती है विचारधारा
चुनावों में नारेबाजी और एक ही बात बार-बार करने से मॉब और हर्ड साइकोलॉजी फैलती है। इसके आधार पर एक विचारधारा पनपती है। इसके विपरीत बात होने पर उत्तेजना प्रकट होती है।

-डॉ. जीडी कूलवाल, वरिष्ठ आचार्य, मनोविकार विभाग, डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज

2. हीरो वर्शिप व केमिकल ट्रांसलेशन
कई लोग किसी न किसी बड़े नेता या अभिनेता से प्रभावित होते हैं। उसी का आचरण व व्यवहार अपनाते हैं। इसको हीरो वर्शिप कहा जाता है। इसी कारण टीवी विज्ञापन में प्रभावशाली लोगों को सम्मिलित किया जाता है। हर सोच व विचारधारा का केमिकल ट्रांसलेशन होता है। हमारी भावना को दूसरी कोशिका में पहुंचाने के लिए केमिकल काम करते हैं। केमिकल ब्रेन का करंट है।

- डॉ. संजय गहलोत, वरिष्ठ आचार्य, मनोविकार विभाग, डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज

3. ग्रे मैटर पर गहरी लाइन का असर

बड़े नेताओं के भाषण का प्रभाव निष्पक्ष आमजन पर ज्यादा पड़ता है। जो अपने विचारों से कट्टर है, उनकी सोच पर कोई असर नहीं पड़ता, जैसे कि कार्यकर्ता। दिमाग में एक व्हाइट व दूसरा ग्रे मैटर होता है। ग्रे मैटर याददाश्त से जुड़ा है। इसमें जितनी गहरी रेखा बनेगी, उतनी ही गहराई से बात दिमाग में घर कर जाती है। बार-बार एक ही बात नेताओं के दोहराने पर ग्रे मैटर पर लाइनें गहरी बनती जाती है।
- डॉ. कैलाशनाथ व्यास, पूर्व विभागाध्यक्ष, समाजशास्त्र विभाग, जेएनवीयू



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