आर्थिक तंगी से जूझ रहे जेएनवीयू ने कार्मिकों को दे डाला 5.53 करोड़ अधिक वेतन, सरकार ने कहा वसूली करो

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गजेंद्र सिंह दहिया/जोधपुर. जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय ने पिछले सालों में अपने सौ से अधिक कर्मचारियों व शिक्षकों को दिल खोलकर वेतन व भत्ते लुटाए। राज्य सरकार की ओर से आई ऑडिट ने विवि की पूरी पोल पट्टी खोलकर रख दी। करीब 5.53 करोड़ रुपए अतिरिक्त विवि कार्मिकों को बांटे गए। अब सरकार ने सातवां वेतनमान देने से पहले विवि प्रशासन को इसकी वसूली के निर्देश दिए हैं। उच्च शिक्षा विभाग ने जेएनवीयू को सभी कर्मचारियों के नाम, पद, कैडर और वसूली राशि का पूरा विवरण भेजा है। विवि को 5.53 करोड़ की वसूली करके राज्य सरकार को सूचित करना है अन्यथा सरकार आगे अनुदान भी रोक सकती है।

विवि के पूर्व कुलपतियों और रजिस्ट्रार्स ने पांचवा और छठा वेतनमान देने के साथ कई शिक्षकों व कर्मचारियों को मनमर्जी से स्थायीकरण करके वेतन शृंखला दे दी। कुछ कर्मचारियों की पद विरुद्ध पदोन्नति कर दी। कुछ शिक्षकों को चयनित पे स्केल देने के साथ कॅरियर एडवांसमेंट स्कीम का भी समानांतर लाभ दे दिया। मनमर्जी से वेतन व भत्ते देने में राज्य सरकार को करीब 5.53 करोड़ का चूना लग गया। पिछले दिनों आई महालेखाकार की ऑडिट ने ये धांधलियां पकड़ी। सातवां वेतनमान मांगने गए विवि के अधिकारियों ने राज्य सरकार को ये दस्तावेज दिखाए। इसके बाद सरकार ने इसी सप्ताह लिखित में आदेश जारी किए हैं। इसमें प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिटेंट प्रोफेसर, असिस्टेंट रजिस्ट्रार, सेक्शन ऑफिसर, एलडीसी, यूडीसी, लैब असिस्टेंट सहित विवि के कई कार्मिक शामिल हैं। सभी से अलग-अलग वसूली करनी है। एक प्रोफेसर से तो 10 लाख रुपए की वसूली की जानी है।


सरकार ने दिए वसूली के निर्देश
राज्य सरकार ने वेतन-भत्ते के रूप में कार्मिकों को अतिरिक्त दिए गए करीब साढ़े पांच करोड़ रुपए की वसूली करने को कहा है। विवि इस पर सकारात्मक कदम उठाएगा।

प्रो गुलाब सिंह चौहान, कुलपति, जेएनवीयू जोधपुर



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