अभिषेक बिस्सा/जोधपुर. पूरे विश्व में गुरुवार को मलेरिया दिवस ( malaria ) मनाया गया। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 35 देशों में साल 2030 तक मलेरिया खत्म करने का लक्ष्य रखा है। इस साल मलेरिया की थीम ‘जीरो मलेरिया स्टाट्र्स विद मी’ (सभी को मलेरिया खत्म करने का प्रयास करना चाहिए, इसी की शुरुआत खुद से करें) रखी गई। जोधपुर की बात करें तो काफी हद तक मलेरिया नियंत्रण में आ चुका है। खुशखबर ये भी है कि गत 15 वर्षों में जोधपुर में एक भी मौत मलेरिया से नहीं हुई।
मलेरिया मादा एनाफिलिज मच्छर काटने से फैलता है। ये मलेरिया प्लाजमोडियम परजीवी के कारण होता है। मलेरिया के लिए मच्छरों की चार प्रजातियां प्लाजमोडियम वाइवैक्स, प्लाजमोडियम फाल्सीफेरम, प्लाजमोडियम मलेरी, प्लाजमोडियम ओवेल को जिम्मेदार माना जाता है। इसमें सबसे घातक प्लाजमोडियम फाल्सीफेरम है। मलेरिया मच्छर ताजा पानी और चावल के खेतों में पनपते हैं। मलेरिया होने पर तेज सर्दी के साथ बुखार, सिरदर्द व उल्टी होने लगती है। श्वास गति प्रभावित होते ही तुरंत चिकित्सक से संपर्क साध लेना चाहिए।
वैक्सीन के लिए चल रहा शोध
मच्छर के डीएनए स्ट्रक्चर में बदलाव लाने पर शोध चल रहा है। इसके तहत मच्छरों के प्लाजोडियम छोडऩे की क्षमता को कम किया जाएगा। ट्रायल चल रही है। रिजल्ट आउट नहीं हुआ है। कई बार मलेरिया में किडनी, ब्रेन फेल, फेफड़ों में पानी भरने और ब्लड प्रेशर गिरने का खतरा रहता है। फिर भी चिकित्सक हालात नियंत्रण में ले आते हैं।
- डॉ. नवीन किशोरिया, वरिष्ठ आचार्य, मेडिसिन विभाग, डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज
बीते पांच सालों की फैक्ट फाइल
साल - प्लाजमोडियम वाइवैक्स - प्लाजमोडियम फाल्सीफेरम
2015 - 338 - 0
2016 - 395 - 4
2017 - 530 - 4
2018 - 153 - 0
2019 - 5 - 0
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