जोधपुर. करीब पांच-छह दशक पहले जोधपुर, पाली व बालोतरा जैसे शहरों की गलियों में कपड़ों की रंगाई शुरू हुई। देखते ही देखते इस व्यापार ने उद्योग का रूप ले लिया। आज तीनों शहरों में डेढ़ हजार से ज्यादा फैक्ट्रियां ऐसा कपड़ा तैयार करती है जोदेश ही नहीं विदेशों तक अपनी पहचान रखते हैं। हजारों लोगों को रोजगार और करोड़ों का व्यापार देने के साथ ही इस उद्योग ने एक दंश भी दिया है। वह है प्रदूषण का दंश। तीनों शहरों के समीप से गुजर रही नदियों की साल दर साल हत्या की जा रही है। पाली के समीप बांडी, बालोतरा के समीप लूणी व जोधपुर के समीप जोजरी नदी की दयनीय स्थिति इन्हीं उद्योगों के कारण हुई है। पर्यावरण पर इस हद तक बुरा प्रभाव डाला गया है कि उद्योगों को बंद करने, करोड़ों का जुर्माना लगाने की नौबत आ गई है। ये स्थिति तब है जब इन उद्योगों के प्रदूषित पानी को ट्रीट करने के लिए करोड़ों रुपए प्रति माह खर्च किया जाता है। नदी के आसपास की जमीनें और खेत बंजर हो गए। अब हालात यह है कि न तो व्यापारी खुश है न ही किसान।
ऐसा है नुकसान का दायरा
- पाली की बांड़ी नदी से नेहड़ा बांध तक करीब 20 गांव प्रदूषित पानी से त्रस्त है।
- बालोतरा व बाड़मेर जिले के करीब 30 गांव लूणी नदी में बह रहे प्रदूषित पानी की परेशानी झेलते हैं।
- जोधपुर जिले के करीब 25 गांव जोजरी नदी में प्रदूषित पानी के कारण कष्ट उठा रहे हैं।
क्लस्टर प्लान भी बना
करीब डेढ़ साल पहले पाली, बालोतरा और जोधपुर तीनों शहरों के जल प्रदूषण के स्थाई समाधान के लिए एक क्लस्टर प्लान बना था। इसमें केन्द्र व राज्य सरकार दोनों ने मंथन भी शुरू किया। एक सुझाव यह भी था कि तीनों शहरों कंी कपड़ा इकाइयों से निकलने वाले प्रदूषित पानी को पाइप लाइन के जरिए कच्छ के रण तक पहुंचाया जाए। लेकिन इसकी स्वीकृति मिलने में परेशानी खड़ी हुई। इसके बाद तीनों शहरों में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज प्रणाली भी लागू करने की बात कही गई। लेकिन यह प्रक्रिया भी अभी अधर में है।
पाली: पानी को ट्रीट करने में हर माह सवा दो करोड़ खर्च, फिर भी आधी क्षमता
पाली में करीब पांच दशक पुराना रंगाई-छपाई का उद्योग कई उतार-चढ़ाव देख चुका है। यहां की साड़ी देशभर में प्रसिद्ध है। पाली का कपड़ा श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल, दुबई तथा देश में आंध्रप्रदेश, तमिलनाडू, केरल, बिहार, यूपी, उड़ीसा, पंजाब, गुजरात समेत कई राज्यों में जाता है। पाली में 550 इकाइयों से निकलने वाले प्रदूषित पानी को ट्रीट करने के लिए 12 एमएलडी के चार प्लांट संचालित हो रहे हैं। लेकिन प्रदूषण की भयावहता के कारण महज आधी क्षमता पर ही उद्योग संचालित किए जा रहे हैं।
लगा जुर्माना और अब यह हालात
प्रदूषण के दंश झेलते हुए पाली पर एनजीटी ने बीते दिनों 20 करोड़ का जुर्माना लगाया था। इसमें एक करोड़ रुपए कपड़ा ट्रीट करने वाले सीईटीपी से वसूला जाना था। इससे पहले कई बार उद्योग को पूरा बंद भी कर दिया गया। बांडी नदी की सफाई के लिए प्लानिंग बन रही है। जोधपुर के इंजीनियरिंग कॉलेज को जिम्मा सौंपा गया। रिवर फ्रंट डवलप करने की योजना है। प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने कसेंट टू ऑपरेट के बिना चल रही 30 फैक्ट्रियां बंद कराई हैं।
आंकड़ों में बात
- 800 इकाइयां (550 रेड तथा 250 ओरेंज कैटेगरी)
- 6 ट्रीटमेंट प्लांट है वर्तमान में। (4 ही संचालित है)
- 7.5 एमएलडी पानी का प्रतिदिन डिस्चार्ज होता है।
- 1 करोड़ मीटर कपड़ा प्रतिदिन तैयार होता है।
- 2.25 करोड़ रुपए प्रतिमाह खर्च पानी ट्रीट करने के लिए।
कर रहे पालना
एनजीटी के निर्देशों की पालना कर रहे हैं। जो भी निर्देश दिए उनकी प्लानिंग बना रहे हैं। अंकुश भी लगाए हैं। अवैध इकाइयों पर कार्रवाई की जाएगी।
- कमलेश गुगलिया, उपाध्यक्ष, सीईटीपी फाउंडेशन
20 से अधिक गांव प्रभावित
किसानों का नुकसान लगातार बढ़ रहा है। पाली जिले के 20 से अधिक गांव प्रभावित हैं। प्रदूषण का स्थाई समाधान होता नजर नहीं आ रहा।
- पुखराज पटेल, अध्यक्ष, किसान पर्यावरण संघर्ष समिति पाली
बालोतरा: ‘मरुगंगा’ को लील गया प्रदूषण
‘मरुगंगा’ कही जाने वाली लूणी नदी के लिए प्रदूषित पानी अभिशाप बना हुआ है। जिन कारखानों ने बालोतरा में रोजगार और आर्थिक उन्नति के द्वार खोले, उनसे ही निस्तारित प्रदूषित पानी ने लूणी नदी और इससे जुड़े बालोतरा से गुड़ामालानी तक के गांवों में जमीन को बंजर कर दिया। 2015 में एनजीटी के जितने सख्त कार्रवाई के आदेश थे प्रशासनिक अमला उतनी सख्ती नहीं बरत पाया। इसलिए लूणी के लिए कारखाने आज भी संकट बने हुए हैं। ट्रीटमेंट प्लांट अपर्याप्त है, कुछ उद्यमियों ने अपने ईटीपी लगाए हैं, लेकिन पूर्णतया पानी ट्रीट का प्रबंध नहीं हो रहा है।
लगा जुर्माना और कार्रवाई भी
मई 2015 में एनजीटी ने बालोतरा, जसोल व बिठूजा की इकाइयों के संचालन पर रोक लगाई थी। एनजीटी ने 50 केएलडी क्षमता की इकाई पर 2 लाख, 50 से 100 केएलडी क्षमता की इकाई पर 3 लाख और 100 केएलडी से अधिक क्षमता की इकाई पर 5 लाख जुर्माना लगाया था। 2017 अक्टूबर में बालोतरा एचआरटीएस की बार-बार दीवार टूटने पर बालोतरा सीईटीपी पर एक करोड़ का जुर्माना लगाया। 2019 जनवरी में बिठूजा एचआरटीएस की दीवार टूटने पर बिठूजा सीईटीपी पर एक करोड़ का जुर्माना। अब एनजीटी ने 30 करोड़ का जुर्माना लगाया है जो कि प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों से वसूला जा सकेगा। वहीं 18 एमएलडी प्लांट बालोतरा में निमार्णाधीन, इसे दिसम्बर 2019 तक पूरा करने का लक्ष्य है। बालोतरा, जसोल में करीब 50 से अधिक उद्यमियों ने ईटीपी प्लांट लगाए हैं।
आंकड़ों की बात
- 400 इकाइयां बालोतरा सीईटीपी से जुड़ी
- 214 इकाइयां बिठूजा सीईटीपी से जुड़ी
- 111 इकाइयां जसोल सीईटीपी से जुड़ी
- 6 एमएलडी का आरओ प्लांट संचालित हो रहा है।
पालना के लिए समझाइश
एनजीटी जो भी निर्णय देता है, उद्यमियों से पालना करने के लिए समझाइश करते हैं। समय-समय पर औद्योगिक क्षेत्र का निरीक्षण करते हैं। कमियां पाए जाने पर इसमें सुधार करते हैं।
- सुभाष मेहता, अध्यक्ष सीईटीपी बालोतरा
कोई सुनवाई नहीं
लूणी नदी में हर वर्ष प्रदूषित पानी आने से कुओं का जल खराब हो गया है। इससे किसानों को हर साल नुकसान सहना पड़ रहा है। हर बार सरकार, प्रशासन से रोकथाम की मांग करते हैं, लेकिन सुनवाई नहीं की जा रही है।
- पोलाराम, किसान
जोधपुर : बोझ बढ़ा रहे पाली-बालोतरा
जोधपुर के समीप से गुजरने वाली जोजरी नदी की स्थिति बदहाल है। यहां के कपड़ा व स्टील उद्योग का करीब 10 एमएलडी पानी प्रतिदिन नदी में छोड़ा जा रहा है। हालांकि जितनी क्षमता जोधपुर की है उस लिहाज से तो अभी पानी आधा ही आ रहा है। लेकिन पाली और बालोतरा में प्रदूषण के हालात विकट व सख्ती होने पर वहां का कपड़ा जोधपुर में धुलाई के लिए आ रहा है। ऐसे में यहां के व्यापार को दंश झेलना पड़ रहा है।
पहले लग चुका जुर्माना, अब ऐसे हालात
जोधपुर के कपड़ा उद्योग पर पहले एक करोड़ रुपए का जुर्माना लग चुका है। अब हालात यह है कि जेपीएनटी से इन इकाइयों को जोडऩे के लिए 50 किलोमीटर की पाइप लाइनों का जाल बना हुआ है।
आंकड़ों में बात
- 312 कपड़ा इकाइयां हैं जोधपुर ट्रीटमेंट प्लांट से जुड़ी।
- 107 इकाइयां स्टील उद्योग की।
- 20 एमएलडी ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता है, 10-11 एमएलडी ही डिस्चार्ज किया जाता है प्रतिदिन।
- 1 करोड़ का जुर्माना पूर्व में जेपीएनटी पर लगाया जा चुका है।
15 को है सुनवाई
हमारे यहां स्थिति नियंत्रण में है। अभी 15 तारीख को सुनवाई होनी है। पाली व बालोतरा से जो कपड़ा आता है, उससे हालात खराब होते हैं। एनजीटी आदेशों की पालना पहले भी की है और आगे भी करेंगे।
- जसराज बोथरा, कार्यकारी ट्रस्टी, जेपीएनटी
कुएं खराब हो चुके
प्रदूषण से जमीन व कुएं खराब हो चुके हैं। कई सालों से परेशानी है। न तो कोई देखने आता है और न ही हमें कोई मुआवजा मिला है। इस समस्या का स्थाई समाधान होना चाहिए।
- मोहनराम पटेल, मेलबा, किसान
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