जोधपुर.
फिल्म अभिनेता सलमान खान के विरुद्ध जिला मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में सीआरपीसी की धारा 340 के तहत पेश किए दो प्रार्थनापत्रों पर शनिवार को सुनवाई नहीं हो सकी। मामले की अगली सुनवाई 26 अप्रेल को
सरकार की ओर से पेश पहले प्रार्थनापत्र में बताया गया कि काला हिरण शिकार प्रकरण में ट्रायल के दौरान सलमान ने झूठा शपथपत्र पेश कर कोर्ट को गुमराह किया। आम्र्स एक्ट मामले में बरी हो चुके सलमान की ओर से शपथपत्र पेश कर बताया गया था कि उसकी रिवाल्वर का लाइसेंस गुम हो गया है। जबकि लाइसेंस नवीनीकरण के लिए मुंबई पुलिस के समक्ष पेश किया गया था।
दूसरी अर्जी में सलमान पर अदालत को गुमराह कर हाजरी माफी लेने का आरोप लगाया गया था। आरोप है कि सलमान ने कान में दर्द होने का झूठा बहाना बनाकर हाजिरी माफी ली जबकि उस दौरान वह फिल्म बजरंगी भाईजान की शूटिंग कर रहे थे।
दूसरी ओर सलमान के अधिवक्ता हस्तीमल सारस्वत ने भी एक प्रार्थना पत्र उसी धारा के तहत पेश किया था। इसमें हिरण शिकार मामले के अनुसंधान अधिकारी ललित बोड़ा के खिलाफ झूठी गवाही देने तथा झूठे शपथ पत्र पेश करने का आरोप लगाया गया था। दोनों प्रार्थना पत्र की सुनवाई एक साथ हो रही है।
हो सकती है सात साल तक की सजा
झूठे शपथ पत्र पेश करने या झूठी गवाही देने वाले गवाहों के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 340 के तहत सरकार अदालत में शिकायत करती है। साबित होने पर झूठे गवाह के खिलाफ आइपीसी की धारा 193 के तहत मुकदमा चलाया जाता है। दोषी साबित होने पर अधिकतम सात साल कैद की सजा का प्रावधान है।
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