जोधपुर. लोकसभा चुनाव में इस बार महत्वपूर्ण भूमिका युवा निभाएगा। ऐसे में सभी पार्टियां युवाओं को अपने पक्ष में मतदान करने के लिए रिझाने में लगी है। इसको लेकर कई तरह की घोषणाएं भी समय-समय पर युवाओं को लुभाने के लिए की जा रही है। लेकिन युवाओं का राजनीतिक पार्टियों को लेकर क्या सोचना है। इस पर टीम ने जयनारायण व्यास विवि में शोध पढा़ई कर रहे छात्रों से चर्चा की। जिसमें युवाओं ने जीएसटी, नोटबंदी को सही बताया, लेकिन विकास के नाम पर पार्टियों की ओर से राजनीति ही की जा रही है की बात भी कही।
चर्चा की शुरुआत में ही शोध छात्र गजेंद्रसिंह आसिया ने कहा कि विकास की बात सभी पार्टियां कर रही है,लेकिन विकास होना ही था तो जोधपुर की स्मार्ट सिटी का दर्जा क्यों नहीं मिला। दिलीप सिंह ने कहा कि चुनाव जीतने के बाद जनप्रतिनिधि अपनों के ही हित साधने में लगा रहता है। जनता की समस्याओं से विशेष सरोकार नहीं रहता है। इसमें पिसना जनता को ही पड़ रहा है।
चुनावी मुद्दे को लेकर गोपाल चंद दर्जी ने कहा कि नेताओं की ओर से आम जनता को मुद्दों पर बात करने के बजाय गुमराह कर बयानबाजी ही की जा रही है। राफेल, चौकिदार चौर है पर बात कर मुद्दों को गायब किया जा रहा है। हर कोई जुमलेबाजी कर रहा है जबकि इसके बजाय विकास की भावना के साथ कार्य करने वाला नेता होना चाहिए।
विडम्बना राजस्थानी को मान्यता नहीं मिल पाई-
राजस्थानी भाषा को मान्यता को लेकर सवाल पर युवाओं के मन की पीड़ा बाहर आ गई। युवा रमेश गोयल ने कहा कि यह राज्य की विडम्बना ही है कि संविधान की आठवीं अनुसूचि में मायड़ भाषा को मान्यता नहीं मिल पाई। जबकि 25 सांसद एक ही पार्टी से चुने गए थे। सर्वेश चारण ने भी कहा कि सिंधी भाषा को मान्यता मिल गई राजस्थानी भाषा को मान्यता नहीं मिली। बजरंग सिंह चारण ने कहा कि जो गरीबी हटाना चाहते हैं वो और अमीर होते जा रहे हैं। रोजगार को लेकर कहा कि सरकार पर दोष न थोपकर उन्हें खुद भी कुछ करना चाहिए। भोपालसिंह गोविंदला ने कहा कि युवाओं के लिए बेरोजगारी मुख्य समस्या है। भर्ती निकलती है तो प्रक्रिया बहुत लम्बी हो जाती है। इसको जल्दी पूरा किया जाना चाहिए।
राजनीति पर ही वंशवाद का आरोप क्यों-
वंशवाद की राजनीति पर सर्वेश चारण ने कहा कि हम राजनीति में ही वंशवाद की बात कर रहे हैं लेकिन इसमें कुछ भी गलत नहीं है। आइएस का बेटा भी आइएस बनेगा तो क्या यह वंशवाद नहीं है क्या। हर पिता अपने बच्चे के लिए बेहतर सोचता है। विक्रम सिंह देथा ने कहा कि वंशवाद सही है, लेकिन थोपा नहीं जाना चाहिए। विक्रम सिंह पाचोटिया ने कहा कि राष्ट्रवाद भी एक मुद्दा है। क्योंकि भारत का कद इन दिनों अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ा है।
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