पाली : पूर्व सांसद बद्रीराम जाखड़ को फिर कांग्रेस ने उतारा है। जाखड़ दूसरी बार मैदान में होंगे। पिछले बार पुत्री मुन्नीदेवी गोदारा ने चुनाव लड़ा था। जाखड़ 2009 में पाली लोकसभा से 1 लाख 96 हज़ार से ज्यादा मतों से चुनाव जीते थे। 2014 में जाखड़ की पुत्री मुन्नीदेवी 4 लाख मतों के अन्तर से हार गई थी। मुख्यमंत्री गहलोत से नजदीकियां और मजबूत जातिगत वोट बैंक ही टिकट मिलने का आधार है।
जालोर : यहां विधानसभा में पूर्व उप सचेतक रतन देवासी को मौका दिया गया है। 2018 का विधानसभा चुनाव वे रानीवाड़ा से हार गए थे। इन्हें भी सीएम गहलोत के नजदीकी होने का फायदा मिला है। जालोर में पहली बार जातिगत समीकरण कुछ रोचक होंगे। इससे पहले जालोर पर दोनों ही पार्टियां बाहरी प्रत्याशियों पर ही प्रयोग करती आई है।
बाड़मेर : पूर्व केन्द्रीय मंत्री व भाजपा के दिग्गज नेता जसवंतसिंह जसोल के पुत्र मानवेन्द्रसिंह कांग्रेस के टिकट पर मैदान में होंगे। स्वाभिमान सभा कर भाजपा से कांग्रेस में आए मानवेन्द्र ने पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के सामने विधानसभा चुनाव लड़ा था। भाजपा ने यहां अभी पत्ते नहीं खोले हैं।
नागौर : तीसरे मोर्चे से गठबंधन की तमाम अटकलों के बीच डॉ. ज्योति मिर्धा को कांग्रेस ने मौका दिया है। कुछ दिन पहले रालोपा के हनुमान बेनीवाल व सीएम गहलोत की मुलाकात ने सियासी गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी थी। इसके बाद कई प्रकार के कयास लगाए जा रहे थे। लेकिन कांग्रेस ने ज्योति मिर्धा पर ही भरोसा जताया है। भाजपा ने अभी यहां पत्ते नहीं खोले हैं।
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