जोधपुर।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी जातीय पंचों (खाप पंचायत) की ओर से जबरन पीडि़त पक्ष से वसूले गए 38 लाख रुपए वापस नहीं लौटाए। पीडि़त पक्ष के एक बार फिर राजस्थान हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने पर अदालत ने शुक्रवार को राज्य के गृह सचिव, सिरोही जिला कलक्टर एवं पुलिस अधीक्षक सहित आरोपी पंचों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
प्रकरण के अनुसार सिरोही जिले में सडक़ दुर्घटना के एक मामले में खाप पंचायत ने याचिकाकर्ता जीवाराम के बेटे राजूराम को दोषी ठहराया था, जबकि पुलिस ने जांच के बाद राजूराम को बेकसूर माना था।
याचिका के अनुसार खाप पंचायत के फरमान पर याचिकाकर्ता को बतौर दंड 28 लाख रुपए चुकाने पड़े। उसे समाज से बहिष्कृत करने के अलावा मानसिक तौर पर प्रताडि़त किया गया।
इसकी एफआइआर दर्ज करवाने पर पुलिस ने पंचों के खिलाफ पेश चालान में माना था कि याची से 28 लाख रुपए वसूले गए।
घटना के दो महीने बाद पंचों ने अपने खिलाफ होने पर एक बार फिर पंचायत बिठाई और उनके खिलाफ दर्ज केस वापस लेने और समाज से पूरी तरह बहिष्कृत करने की चेतावनी देने के साथ 10 लाख रुपए का दंड और वूसल लिया। याची ने इसकी भी पुलिस में शिकायत की और जांच में आरोप सही पाए गए।
अधिवक्ता विक्रमसिंह राजपुरोहित ने बताया कि याची ने पहली बार पिछले साल अक्टूबर में याचिका दाखिल की और दंड के रूप में वसूले गए कुल 38 लाख रुपए लौटाने की गुहार की थी। हाईकोर्ट ने जातीय पंचों को व्यक्तिगत रूप से तलब भी किया।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने ट्रायल कोर्ट को बताया कि जातीय पंच दंड की रकम खर्च कर चुके हैं जिसकी वसूली संभव नहीं है। इस पर याची ने एक बार फिर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है।
न्यायाधीश पुष्पेन्द्रसिंह भाटी ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए हैं।
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