अभिषेक बिस्सा/जोधपुर. एक तरफ जहां जोधपुर को चार्टर्ड अकाउंटेंट का गढ़ माना जाता है, दूसरी ओर शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को कॉमर्स पढ़ाने के लिए पर्याप्त संख्या में शिक्षक तक उपलब्ध नहीं करा पा रहा है। जिले के 333 स्कूलों में कॉमर्स संकाय नहीं है। कॉमर्स का अध्ययन करने के इच्छुक बच्चों को निजी व दूरदराज की स्कूलों में जाकर अध्ययन करना पड़ता हंै। इन हालातों से शिक्षा विभाग के अधिकारी भी वाकिफ हैं, लेकिन सरकारी स्कूलों में कॉमर्स विषय खोलने के लिए कोई प्रस्ताव तक राज्य सरकार को नहीं भिजवाया जाता। गांवों में मजबूरन नई पीढ़ी को साइंस व आट्र्स जैसे विषय लेकर काम चलाना पड़ता है। यह स्थिति तब है जब जोधपुर के एक होनहार ने इसी वर्ष देशभर में सीए में टॉप कर शहर का नाम रोशन किया है।
150 स्कूलों में कॉमर्स, 39 में कोई व्याख्याता नहीं
शिक्षा विभाग के शाला दर्पण में दर्ज रिकार्ड पर नजर डाले तो कुल 483 राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय विद्यालय हैं। इनमें से महज 150 स्कूलों में कॉमर्स विषय पढ़ाया जाता है। 39 स्कूल ऐसी हैं, जहां कॉमर्स विषय होने के बावजूद कोई व्याख्याता नहीं लगा हैं। ऐसे में द्वितीय श्रेणी शिक्षकों के भरोसे ही कॉमर्स पढ़ाई जा रही है। इस कारण विद्यार्थी कॉमर्स जैसे महत्वपूर्ण विषय की ढंग से शिक्षा तक नहीं ले पा रहे हैं। विभाग के शाला दर्पण पर कॉमर्स के विषयों का कोई वर्गीकरण नहीं किया गया है। जैसे लेखाशास्त्र व व्यवसायिक संगठन के विषयों के व्याख्याताओं की अलग-अलग पदों की स्वीकृति व रिक्तियां नहीं दर्शाई गई है। यहां केवल कॉमन शब्दों में कॉमर्स विषय ही लिखा हुआ है। जबकि साइंस में रसायन शास्त्र व भौतिक शास्त्र के व्याख्याताओं के अलग-अलग पद दर्शाए हुए हैं।
स्कूलों में होना चाहिए कॉमर्स सब्जैक्ट
सरकारी स्कूल वाकई में कॉमर्स विषय के प्रति उदासीन है। कक्षा 9 में पहले कॉमर्स सब्जैक्ट के तीन पाठ्यक्रम थे, जो हटा दिए गए। कॉमर्स विषय तो कक्षा नवम-दसवीं में भी होना चाहिए। कॉमर्स के विषय का वर्गीकरण भी शिक्षा विभाग ने नहीं कर रखा है। जबकि अच्छा व्यवसायी बनने के लिए कॉमर्स अच्छा ज्ञान देती है।
- भंवराराम जाखड़, प्रदेश संयुक्त महामंत्री, राजस्थान शिक्षक एवं पंचायती राज कर्मचारी संघ
रुचि अनुसार खोलते हैं सब्जेक्ट
हमारे सेवा नियमों में वाणिज्य व्याख्याता का ही पद लिखा जाता है। जहां कॉमर्सियल चीजें है, वहां ज्यादा क्रेज रहता है। अभिभावकों और विद्यार्थियों की रुचि अनुसार सब्जैक्ट खुलता है।
- बंशीधर गुर्जर, संयुक्त निदेशक, शिक्षा विभाग
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