जापान, यूके व यूएसए के चिकित्सक अपनाएंगे जोधपुर के आयुर्वेद का फॉर्मूला

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-राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय से सम्बद्ध आयुर्वेद चिकित्सालय में नि:संतानता के इलाज पर सफल प्रयोग,

-8 महिलाओं को मिला मातृत्व सुख

के. आर. मुण्डियार

जोधपुर.

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय से सम्बद्ध आयुर्वेद अस्पताल में नि:संतानता के इलाज में किए गए आयुर्वेदिक चिकित्सा के सफल नवप्रयोग के फॉर्मूले को जापान, यूके, यूएसए के चिकित्सक भी अपनाएंगे। साथ ही जोधपुर एम्स में भी आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति से निसंतानता का इलाज किया जाएगा।
हाल ही विश्वविद्यालय में सम्पन्न हुई मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुरक्षा विषयक अन्तरराष्ट्रीय कांफ्रेंस-कौमारकॉन-2019 में भाग लेने आए देशभर के 350 गायनिक विशेषज्ञों के अलावा जापान, यूएसए, यूके के विशेषज्ञों ने इस नव प्रयोग को समझा और कारगर बताते हुए अनुसरण करने की बात कही।

जोधपुर के करवड़ स्थित विश्वविद्यालय में संचालित आयुर्वेद अस्पताल ने आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रक्रिया से नि:संतानता का इलाज करने में विशेष कामयाबी हासिल की है और पिछले कुछ समय से ऐसी महिलाओं को संतान प्राप्ति करवाई, जो नि:संतानता की बीमारी से पीडि़त थीं। विवि के कुलपति प्रो. राधेश्याम शर्मा ने बताया कि आधुनिक खानपान और मानसिक तनाव के कारण वर्तमान में दम्पत्तियों में नि:संतानता अभिशाप के रूप में उभर रही है। लेकिन अब आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रक्रिया से नि:संतानता से पीडि़त दम्पत्तियों को बगैर साइड इफैक्ट के संतान प्राप्ति का स्वप्न साकार हो रहा है। आयुर्वेद अस्पताल में ऐसी कई महिलाओं ने परामर्श व इलाज लिया है। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रश्मि शर्मा एवं उनकी टीम ने 8 एेसी महिलाओं को परामर्श के साथ इलाज दिया तो उन्हें संतान प्राप्ति हो गई।

ऐलोपैथी में असफसल, आयुर्वेद से इलाज-
कुछ महिलाएं विवाह के पांच-दस वर्ष उपरान्त भी मातृत्व सुख से वंचित थीं। उम्र तीस वर्ष से अधिक हो जाने के कारण उनकी दोनों बीजग्रन्थियों में परिपक्व अण्डों का निर्माण नहीं हो रहा था। इन महिलाओं ने कुछ वर्षों तक ऐलोपैथी पद्धति से उपचार लिया, लेकिन इलाज सफल नहीं रहा। इसके बाद इन महिला मरीजों ने आयुर्वेद चिकित्सालय में इलाज शुरू करवाया। यहां उन्हें भर्ती कर पंचकर्म चिकित्सा (स्नेहपान और वमनकर्म) एवं औषधियां शुरू की गई। उपचार की अवधि में महिलाओं ने विशेष खान-पान का पालन किया। उपचार के बाद महिलाओं में अण्डे परिपक्व बनने लगे और कुछ के अण्डाशय में निर्मित गांठें भी ठीक हो गई। कुछ समय बाद वे गर्भवती हो गई और स्वस्थ शिशुओं को जन्म दिया। अण्डे का न बनना, बीजवाहिनियों व गर्भाशय की विकृति और अन्त:स्रावों का असन्तुलन महिलाओं में निसंतानता के प्रमुख कारण हैं।

आयुर्वेदिक उपचार की पद्धति-
नि:संतानता में प्रयोग ली जा रही आयुर्वेदिक उपचार चिकित्सा जैसे स्नेहपान, अभ्यंग, स्वेदन, वमन, विरेचन आदि पंचकर्म की प्रणाली से युक्त होने के कारण हानिरहित हैं। इलाज में पूर्णत: प्राकृतिक औषधि जैसे सौंफ, सुंआ, धनियां, मिश्री, दूब, निम्ब, हल्दी, अजवाइन इत्यादि प्रयोग में ली जाती है। इनका कोई दुष्प्रभाव नहीं होता।

अन्य जटिल बीमारियों का भी इलाज-

आयुर्वेद चिकित्सालय में स्त्री रोग से संबंधित अन्य जटिल व लाइलाज जैसे अनियमित मासिकधर्म, अंडाणु का न बनना या कम बनना, बार-बार गर्भपात, बच्चा न ठहरना, श्वेतप्रदर, रक्तप्रदर, संक्रमण, गर्भाशय में गांठ या घाव, मासिकधर्म में दर्द होना, ब्रेस्ट में गांठ इत्यादि बीमारियों का इलाज भी हो रहा है।



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