जोधपुर
भारतीय वायुसेना की युद्धक ताकत पाकिस्तान की तुलना में बहुत भारी है। खास बात यह है कि भारतीय वायुसेना के पास तमाम तरह के लड़ाकू विमान बेहद अनुभवी है। और ऐसे विमान समय-समय अपनी ताकत का अहसास कराते रहते हैं। पुलवामा आतंकी हमले के बदले के रूप में भारतीय वायुसेना की POK में पहली और सबसे बड़ी एयर स्ट्राइक से भी यह साफ हो गया है कि भारतीय वायुसेना में वह क्षमता है कि वह दुश्मन को घर में घुसकर मात दे सकता है। भारतीय वायुसेना के बेड़े में ऐसे कई लड़ाकू विमान है, जो मिनटों के रेस्पोंस में दुश्मन देश को सबक सिखा सकते हैं।
भारतीय वायुसेना के अनुभवी लड़ाकू विमान बहुत हैं। फिर भी हमारी ताकत और अधिक मजबूत रहे, इसलिए भारत को नए एयरक्राफ्ट बढ़ाने चाहिए।
यह बात अलग है कि वर्ष 1971 में भारत-पाक युद्ध के समय भारतीय वायुसेना के बेड़े में जितने (600) लड़ाकू विमान थे, आज करीब पचास साल बाद 2019 में भी लगभग इतने ही एयरक्राफ्ट बचे हैं। ऐसा इसलिए क्यों कि बेड़े में जितने विमान बढ़े, लगभग उतने ही क्रेश हो गए। हालांकि, युद्धक क्षमता के मामले में भारतीय वायुसेना पाकिस्तान की तुलना में बहुत भारी है।
बगैर लड़े दो स्क्वाड्रन खत्म-
वायुसेना के लड़ाकू विमानों की उम्र बढ़ रही है और वे लगातार क्रेश भी हो रहे हैं। पिछले पांच साल में 34 लड़ाकू विमान क्रेश हुए हैं। यानी दो स्क्वाड्रन आसमान में ही बगैर लड़े खत्म हो गई। इस साल एक महीने में ही पांच लड़ाकू विमान क्रेश हो गए। उधर, जोधपुर एयरबेस पर तैनात मिग-27 अपग्रेडेड लड़ाकू विमान की दोनों स्क्वाड्रन के साथ अन्य एयरबेस पर तैनात मिग-21 स्क्वाड्रन भी इस साल के अंत तक रिटायर हो जाएगी। एयरफोर्स की वर्तमान जरूरत 42 स्क्वाड्रन की तुलना में इस साल के अंत तक केवल 27 स्क्वाड्रन बचेगी।
जोधपुर में बचेगी एक स्क्वाड्रन-
जोधपुर एयरबेस पर वर्तमान में सुखोई-30 एमकेआइ की एक और मिग-27 अपग्रेडेड विमान की दो स्क्वाड्रन हैं। मिग-27 की दोनों स्क्वाड्रन के इस साल रिटायर होने के बाद केवल एक स्क्वाड्रन रह जाएगी। वैसे पिछले सप्ताह एयरफोर्स में शामिल तेजस की एक स्क्वाड्रन जोधपुर में तैनात करने पर विचार किया जा रहा है।
उम्रदराज विमान-
56 साल पहले मिग-21 आए थे।
45 साल पहले मिग-27 शामिल ।
34 साल हो गए हैं मिराज-2000 विमान को, यह फ्रांस से लाया गया।
30 साल हुए मिग-29 व सुखोई को।
इस साल के हादसे-
27 जनवरी को उत्तरप्रदेश के कुशीनगर में जगुआर क्रेश।
31 जनवरी को बेंगलूरू में मिराज-2000 क्रेश, पायलट की मौत।
12 फरवरी पोकरण में मिग-27 क्रेश।
18 फरवरी को बेंगलूरू में सूर्यकिरण टीम के दो हॉक विमान टकराए, एक पायलट की मौत।
वायुसेना के पास किसकी-कितनी स्क्वाड्रन
विमान------------स्क्वाड्रन
मिग-21------------ 6
मिग-27------------2
मिग-29------------3
जगुआर------------6
सुखोई-30------------11
मिराज-2000------------3
पांच साल में लड़ाकू विमान की दुर्घटनाएं
वर्ष ------------क्रेश
2014------------10
2015------------6
2016------------10
2017------------5
2018------------3
2019------------5
(एक स्क्वाड्रन में 16 से 18 विमान होते हैं।)
हथियारों के राजनीति में पडऩे से सेना का आधुनिकीकरण पिछड़ रहा है। राफेल लाने में इतनी देरी हो चुकी है कि तब तक पड़ौसी अपग्रेड हो गए। वायुसेना पहले ही लड़ाकू विमान को लेकर सरकार को दो बार तकनीकी जरूरत बता चुकी है।
-एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ, भारतीय वायुसेनाध्यक्ष
(19 दिसम्बर 2018 को जोधपुर में कहा था।)
Report By- गजेंद्र सिंह दहिया
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