आखों से छलकते आंसू, बताई पीड़ा-
केस नं. 1 - गेम खेलने से रोकने पर फांसी लगाकर जान देने की धमकी-
फलोदी तहसील के एकां भाटियान निवासी एक माता ने पत्रिका को बताया कि उनका 18 वर्षीय पुत्र पिछले कुछ समय से मोबाइल पर दिन-रात पबजी गेम खेल रहा है तथा कॉलेज में अध्ययनरत है। अब हालात ये बन गए है कि पढ़ाई की तरफ तो ध्यान ही नहीं दे रहा है। इतने में ही मां के आंखों से आंसू बहने लगे और कहा कि जब हम उसे यह गेम खेलने से टोकते है या मोबाइल छीनते है, तो बेटे ने फांसी लगाकर अपनी जान देने की बात तक कह दी है। वहीं दूसरी तरफ वह इस गेम के नशे में इस कदर उलझा है कि वह परीक्षा नहीं देने की बात कह रहा है।
केस नं.2 - गेम के कारण नहीं दी कॉलेज की परीक्षा-
शहर के गौशाला क्षेत्र निवासी एक माता ने पत्रिका को बताया कि उनका पुत्र कॉलेज में पढ़ता है तथा 14 फरवरी को परीक्षा थी, लेकिन पबजी खेलने के कारण इस गेम के नशे में परीक्षा ही नहीं दी। अगर परिवार के लोग उसे गेम खेलने से रोकते है, तो परिजनों के साथ मारपीट करना शुरू कर देता है। साथ ही अपनी जान देने की धमकियां देता है।
पबजी गेम पर रोक की उठ रही मांग-
राजस्थान पत्रिका द्वारा पबजी गेम पर रोक लगाने के लिए शुरू किए गए अभियान के बाद लोगों काफी जागरूकता आई है तथा लोग युवाओं को उनकी राह से विचलित होने से बचाने के लिए इस गेम पर रोक लगाने की मांग कर रहे है। बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य हो रहा प्रभावित-
पबजी गेम खेलने वाले बच्चे व युवा लगातार इस गेम के सम्पर्क में रहने से नशे की तरह इस गेम की लत में आ गए है। इससे बच्चों में चिड़चिड़ापन आ जाता है तथा अलग-थलग रहने लगते है। दिन-रात लगातार इस गेम को खेलने के कारण बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है।
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