अविनाश केवलिया/जोधपुर. भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की जांच झेल चुके जोधपुर विकास प्राधिकरण में एक और निर्माण में गड़बड़झाला सामने आया है। खुद अपने ही कार्यालय के निर्माण कार्य में लेटलतीफी के पीछे कारण एस्टीमेट ही बिगड़ जाना है। जितनी राशि प्रारंभिक तौर पर स्वीकृत की, उसमें से दो तिहाई लगा दी। लेकिन निर्माण कार्य पूरा नहीं होता देख, एस्टीमेट फिर बढ़ा दिया। जिसे वित्तीय स्वीकृति नहीं मिली और अब पिछले छह माह से काम बंद पड़ा है। जेडीए परिसर में ही नए कार्यालय भवन का कार्य शुरू होते ही मूल डिजाइन व प्रोजेक्ट में कई बदलाव होने शुरू हो गए। बहुमंजिला इस भवन के लिए शुरुआती स्वीकृति 15.64 करोड़ की जारी की गई। लेकिन जैसे-जैसे निर्माण में संशोधन होते गए लागत बढ़ती गई। इसके बाद जेडीए अभियंताओं ने इस प्रोजेक्ट का रिवाइज एस्टीमेट बनाया और लागत 25 करोड़ कर दी। लेकिन उसे वित्तीय स्वीकृति नहीं मिली। 11.57 करोड़ रुपए के काम होने के बाद इस निर्माण को ऐसे ही रोक दिया गया। तब से यह यह निर्माण कार्य अधूरा ही पड़ा है।
डर से रोका काम
अपने ही बनाए एस्टीमेट को बदलने के लिए जेडीए प्रशासन ने कई प्रयास किए। लेकिन पुराने एस्टीमेट का 50 प्रतिशत से अधिक काम होने के बाद उसे बदला नहीं जा सका। नियमों के फेर में यह निर्माण भी कहीं भ्रष्टाचार की जांच में न चला जाए इसलिए अभियंताओं ने इस काम को रोकना ही उचित समझा।
एक नजर में कार्य
- 15.64 करोड़ की शुरुआती स्वीकृति जारी की गई।
- 11.57 करोड़ का काम होने के बाद मालूम हुआ कि स्वीकृत राशि में काम नहीं होगा।
- 25 करोड़ का रिवाइज एस्टीमेट बनाया गया।
- 06 माह से बंद पड़ा है काम- 04 मंजिला बन रहा नया जेडीए कार्यालय
- 7 साल से चल रहा भवन का निर्माण कार्य
- 7 और फिर 9 मंजिला किया प्रस्तावित नए एस्टीमेट में
- लेकिन नियमों के फेर में वित्तीय स्वीकृति जारी नहीं हुई।
- ऐसे में काम बंद कर दिया गया।
- अब इसका हल निकालने और नए सिरे से टैंडर करने की तैयारी की जा रही है।
खड़े होते हैं कई सवाल
- जब खुद का कार्यालय ही समय पर पूरा नहीं करवा सकते तो शहर के अन्य विकास कार्य कैसे समय पर पूरे होंगे?
- जब एस्टीमेट में इस प्रकार गड़बड़ी होती है शहरी विकास कार्यों का एस्टीमेट कैसे बनता होगा?
- यदि एस्टीमेट के बाद संशोधन हुए तो उन्हें समय रहते क्यों स्वीकृत नहीं करवाए गए?
इनका कहना...
रिवाइज एस्टीमेट की स्वीकृति नहीं मिली थी। ऐसे में अब तक हुए काम का सम्पूर्ण भुगतान कर नए टैंडर करना ही समाधान है। जल्द इस संबंध में निर्णय किया जाएगा।
- सुखराम चौधरी, अधीक्षण अभियंता, जोधपुर विकास प्राधिकरण
निर्माण में कुछ बदलाव किए गए होंगे। इस बारे में पूरी जानकारी लेकर जो भी समाधान हो सकता है वह किया जाएगा।
- गौरव अग्रवाल, आयुक्त, जोधपुर विकास प्राधिकरण
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