जोधपुर. राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय की ओर से प्रदेश के करीब 45 कॉलेजों को शैक्षणिक सत्र 2019-2020 की मान्यता देने में भारी गड़बड़ी सामने आई है। तत्कालीन कुलपति डॉ. राधेश्याम शर्मा ने अपने सेवानिवृत्ति से 4 चार दिन पहले आदेश निकालकर अयोग्य शिक्षकों से कॉलेजों को कागजी निरीक्षण करवाया और चार दिन में ही करीब 45 कॉलेजों का निरीक्षण हो गया। इससे प्रदेश में आयुर्वेद, यूनानी और होम्यापैथी चिकित्सा शिक्षा पर सवाल उठ खड़े हुए हैं।
डॉ. शर्मा 18 फरवरी को सेवानिवृत्त हुए थे। इसके चार दिन पहले 14 फरवरी को उन्होंने कॉलेजों के निरीक्षण के आदेश जारी करने के साथ निरीक्षण टीमें गठित कर दी। टीम को ये आदेश अगले दिन मिले और दो-तीन दिन में श्रीगंगानगर से लेकर उदयपुर तक के कॉलेजों का निरीक्षण हो गया। गौरतलब है कि विवि से सम्बद्ध कॉलेजों का शैक्षणिक सत्र 30 सितम्बर से शुरू होता है और विवि हर साल अप्रेल-मई में निरीक्षण करवाता है जो करीब एक महीने में पूरा होता है।
नियमानुसार निरीक्षण टीम में प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर स्तर के शिक्षक होते हैं लेकिन डॉ. शर्मा ने असिस्टेंट प्रोफेसर स्तर के शिक्षकों को भी टीम में लगा दिया। यहां तक की छह महीने पहले विवि में प्रतिनियुक्ति पर आए आयुर्वेद चिकित्सकों को भी इसमें झौंक दिया, जो निरीक्षण के मापदण्ड से भी अनभिज्ञ थे।
आयुष मंत्रालय ने मान्यता रोकी, विवि ने दे दी
श्रीगंगानगर स्थित पंजाब आयुर्वेद कॉलेज मोरजंदा, किशनगढ़ स्थित सांई बाबा आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज रैनवाल और जयपुर स्थित राजस्थान यूनानी कॉलेज को अभी तक भारत सरकार ने अनुमति नहीं दी है। केंद्रीय आयुष मंत्रालय ने पिछले साल इन कॉलेजों का निरीक्षण किया था जिसमें आधारभूत सुविधाओं व शिक्षकों की कमी पाई गई। लेकिन आयुर्वेद विवि की टीम ने इन कॉलेजों का निरीक्षण करके शैक्षणिक सत्र 2018-19 की मान्यता दे दी और यहां शैक्षणिक सत्र भी शुरू हो गया।
एसी ने दी अनुमति, अब पछतावा
आयुर्वेद विवि की एकेडमिक कौंसिल को इससे सम्बद्ध कॉलेजों का निरीक्षण करने की शक्ति है लेकिन एकेडमिक कौंसिल ने सर्वसम्मति से एक नियम पास करके कुलपति को इसके लिए अधिकृत कर दिया था। अब कौंसिल में शामिल शिक्षकों को पछतावा हो रहा है।
सेवानिवृत्ति के दिन भी उठापठक
डॉ. शर्मा ने 18 फरवरी को अपने सेवानिवृत्ति के अंतिम दिन यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ आयुर्वेद के प्राचार्य को हटाकर अपने चहेते शिक्षक को कुर्सी पर काबिज कर दिया। एक जूनियर शिक्षक को एकेडमिक डीन बना दिया, जबकि कई प्रोफेसर मुंह ताकते रह गए। कुलपति डॉ. शर्मा के 8 साल के कार्यकाल से गुस्साए अधिकांश शिक्षकों ने सेवानिवृत्त समारोह का बहिष्कार किया था।
विवि से सम्बद्ध प्रदेश के कॉलेज
- 9 कॉलेज आयुर्वेद के
- 5 कॉलेज होम्योपैथी के
- 3 कॉलेज यूनानी के
- 28 नर्सिंग सेंटर एसी में रखा जाएगा मुद्दा
इनका कहना है...
‘कॉलेजों का नियमविरुद्ध निरीक्षण करवाने का मुद्दा एकेडमिक कौंसिल में रखा जाएगा। तत्कालीन कुलपति की ऐसी क्या मजबूरी थी कि सेवानिवृत्ति से चार दिन पहले उन्हें अयोग्य शिक्षकों से निरीक्षण करवाना पड़ा।
प्रो. गोविंद सहाय शुक्ला, एकेडमिक कौंसिल सदस्य, राजस्थान आयुर्वेद विवि,जोधपुर
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