...कभी यहां की भी सुध ले लीजिए!

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जोधपुर. 25 जनवरी 2014 का दिन...। जोधपुर शहर इस दिन एक एतिहासिक पल के लिए इतरा रहा था। आखिर इस शहर में 100 फीट ऊंचा तिरंगा शान से लहराने लगा था। पूरे शहर ने इस एतिहासिक व देशभक्ति से परिपूर्ण पल को अपनी यादों में संजोने में कोई कसर भी नहीं छोड़ी थी। लेकिन समय की रफ्तार के साथ-साथ जिम्मेदार संस्था नगर निगम ने इस एतिहासिक स्थल को भुला दिया है। पांच साल बाद अब यहां सिर्फ और सिर्फ वीरानी छाई रहती है। इक्का-दुक्का लोग ही यहां कभी-कभार इस तिरंगे को निहारने आते हैं। वे भी यहां के हालातों को देखकर वापस लौट जाते हैं। कलक्ट्रेट के ठीक सामने महावीर उद्यान में यह तिरंगा लहरा रहा है। लेकिन इसका फाउंडेशन पूरी तरह से बिखर गया है। जब यह तिरंगा यहां लगाया था तो सुंदरता खुद ही बोल उठती थी। तिरंगे की जानकारी देते बोर्ड थे। पत्रिका टीम ने शनिवार को यह स्थल देखा तो हालात बद से बदतर ही नजर आए। आश्चर्य तो तब हुआ जब इसके मुख्य गेट पर ताला लटका मिला। अंदर शिलापट्ट तो धूल से इतना सना हुआ था कि कुछ भी नजर नहीं आया। तिरंगे के नीचे घास सूखी मिली तो फाउंटेन तो मानो लम्बे समय से ही बंद होने की कहानी बयां कर रहे थे। जबकि इसके फाउंडेशन निर्माण पर निगम ने लाखों रुपए खर्च किए गए थे। दुखद स्थिति तो तब देखने को मिली एक कोने में कुछ लोग लघुशंका करने से नहीं हिचक रहे थे। जबकि जिस समय यह तिरंगा लहराया गया, तब यहां नियमित गार्ड व सफाई की जिम्मेदारी निगम ने संभाली, लेकिन अब देशभक्तों की याद में लहराया गया यह तिरंगा सिर्फ यहां की बदहाली की गाथा गाते ही नजर आ रहा है।



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