खुशखबरी: राजस्थान में यहां लगाया जाएगा सुपर कंप्यूटर, प्रदेशवासियों की जिंदगी को आसान बनाने वाली तकनीक पर होगा काम

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जोधपुर.
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) जोधपुर कृत्रिम बुद्धिमता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) पर शोध शुरू करने जा रहा है। इसके लिए आइआइटी में एक विशेष लैब निर्मित कर उसमें सुपर कंप्यूटर लगाया जाएगा। संभवत: प्रदेश का यह पहला सुपर कंप्यूटर होगा। सुपर कंप्यूटर की सहायता से राजस्थान के लोगों की जिंदगी को आसान बनाने वाली कंप्यूटर तकनीक विकसित की जाएगी।

आइआइटी जोधपुर और कंप्यूटर क्षेत्र की कंपनी नीविडिया के मध्य एआइ पर शोध को लेकर बुधवार को एक एमओयू साइन किया गया। साथ ही आइआइटी ने अपने 'सेंटर फॉर नेक्स्ट जनरेशन एआइ रिसर्च- एआइनेस्ट' लॉन्च करने की घोषणा की। आइआइटी जोधपुर के निदेशक प्रोफेसर शांतनु चौधरी और नीविडया दक्षिण एशिया के महाप्रबंधक विशाल धूपर ने बुधवार को संयुक्त रूप से बताया कि आइआइटी में अब एआइ पर शोध होगा, जिससे आम लोगों की जिंदगी को आसान बनाया जा सकता है। हालांकि भारत में एआइ का क्षेत्र नया है लेकिन इसमें संभावनाएं बहुत हैं।

भारत और अमरीका के एआइ में यह फर्क
विकसित और विकासशील देशों की एआइ में काफी अंतर है। यहां स्वास्थ्य, शिक्षा, ट्रांसपोर्ट जैसे आधारभूत कार्यों को त्वरित गति से करने और बढ़ती जनसंख्या के लिए सुविधाएं मुहैया करवाने के लिहाज से एआइ बड़ी उपयोगी सिद्ध होगी। विकसित देशों में जीवन को अत्यधिक आरामदायक बनाने में एआइ का उपयोग हो रहा है। जैसे- घर में टीवी, फ्रिज, एसी ऑन-ऑफ करना, वाशिंग मशीन व लॉन्डिंग से कपड़े धुलना जैसे कार्य एआइ की मदद से हो रहे हैं।

सुपर कम्प्यूटर से बनाई जाएगी एप्लीकेशन्स

आइआइटी में इसके लिए एक विशेष लैब स्थापित की जा रही है। जहां सुपर कंप्यूटर के माध्यम से ऐसी एप्लीकेशन बनाई जाएगी, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी में होने वाले कार्यों को त्वरित गति से निपटाया जा सके। यह ठीक वैसा ही है जैसा गूगल जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने स्मार्ट घर, स्मार्ट ऑफिस की अवधारणा दी है। वैसे आइआइटी का कार्य आम लोगों को मूलभूत सेवाएं त्वरित व सस्ते दाम पर उपलब्ध करवाना है।

हैल्थ से लेकर ट्रैफिक सेक्टर तक होगा फायदा

- जोधपुर में बढ़ते स्वाइन फ्लू को लेकर जिस तरह से पूरे देश में पैनिक है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विकसित होने के बाद स्वाइन फ्लू के अत्यधिक फैलने का कारण भी चिकित्सक जल्द पकड़ पाएंगे।

- सिलिकोसिस, एक्स-रे एमआरआई सहित स्वास्थ्य क्षेत्र में अनुप्रयोग के साथ बैंकिंग, ट्रैफिक जैसे क्षेत्रों में भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से तैयार एप्लीकेशन से मदद मिलेगी।



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