नीम और पीपल को जमीं निगल गई या आसमां!

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पीपाड़सिटी (जोधपुर). 25 अक्टूबर की देर रात व्यास चौक में लगे सालों पुराने नीम व पीपल के पेड़ को उखाड़ कर ले जाने वाले का 2 माह से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद पता नहीं चल पाया है। इन पेड़ों को धरती निगल गई या आसमान खा गया! कोई पता नही लगा सका। इस बीच पर्यावरण संरक्षण समिति ने उसी स्थान पर पिछले दिनों नीम व पीपल के पौधे लगा दिए है।

 

व्यास चौक में नीम के पास लगे पीपल के पेड़ पर हर त्यौहार पर महिलाए पूजा करने आया करती थी। उस दिन सुबह जब ये दोनों पेड़ गायब मिले तो पीपाड़ के लोगों में आक्रोश था।

 

आशंका यह जताई जा रही है कि इसी आक्रोश के चलते यह मामला दबा दिया गया। एक संगठन इसे हटाना चाहता था, उसके लिए लिखित में नगरपालिका को दिया गया था। पेड़ गायब होने पर जब इस संगठन का नाम आया तो पालिका ने यह कहते हुए इस संगठन को एक तरह से क्लिन चिट दे दी थी कि हमने इन पेड़ों के हटाने के आवेदन पर स्वीकृति नहीं दी है।

 

पेड़ गायब होने के बाद घटनाक्रमों पर जिस तरह की प्रतिक्रिया हुई उससे शक की सुई नगपालिका की ओर घूम रही है। उसी दौरान इस चौक में नगरपालिका का सौन्दर्यीकरण अभियान चल रहा था। उसी दौरान पेड़ रातों-रात गायब हो गए।


शहर के सबसे व्यस्त चौक और हाई मास्क लाइट की रोशनी में रात के नहाने वाले चौक से इस तरह दो पेड़ों का बिना पता लगे चुरा कर ले जाने की बात हर किसी के गले नहीं उतर पा रही है। एेसी जगह जहां रात 2 बजे तक लोगों का आना जाना लगा हो। कोई एक अकेला चोर चुरा कर नहीं ले जा सकता। इनको बिना जे सी बी और ट्रैक्टर ट्रॉली में डाले कोई एक आदमी गायब नही कर सकता? तो सवाल उठता है कि बिना नगरपालिका की मिलीभगत के यह कैसे हो सकता है?

 

दूसरे पीपल और नीम जैसे धार्मिक और औषधिय महत्व के बड़े आकार और कई टन वजन के पेड़ों की चोरी को लेकर न तो पालिका ने और न ही ठेकेदार ने पुलिस में रिपोर्ट पेश की। जबकि सार्वजनिक सम्पति के इन पेड़ों की सुरक्षा और संरक्षा का दायित्व पालिका का है। बिना मुकदमे के पुलिस भी जांच नही करती है।

 

लोगों ने उपजिला प्रशासन को पूर्व में ज्ञापन दिया जो कही फाइलों में दब गया है। व्यास चौक और इससे गुजरने वाले सभी रास्तों पर सी सी टी वी कैमरे भी लोगों ने लगा रखे है। यदि पालिका पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाती तो चोरी का राज खुल सकता था।

 

इनका कहना है

पुलिस में किसी ने कोई रिपोर्ट पेश नहीं की। अगर होती तो मुकदमा दजऱ् कर जाँच के बाद दोषियों को कानून की गिरफ्त में लिया जाता।
-चम्पाराम, पुलिस थाना अधिकारी, पीपाड़सिटी



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