संक्रामक बीमारियां : पांच साल बाद भी न शोध शुरू हुआ ना प्रशिक्षण

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के. आर. मुण्डियार

रियल रिपोर्ट-

जोधपुर.

संक्रामक बीमारियों पर अनुसंधान व उपचार संबंधी प्रशिक्षण के लिए जोधपुर में पांच साल पहले खोला गया प्रदेश का एकमात्र संक्रामक रोग संस्थान अपने उद्देश्य पूर्ति के लिए ही तरस रहा है। संस्थान में पांच साल में संक्रामक बीमारियों पर शोध करना तो दूर चिकित्सा स्टाफ के लिए ट्रेनिंग कोर्स तक शुरू नहीं किए जा सके हैं। जबकि जोधपुर समेत प्रदेश के कई जिलों में पिछले कई सालों से स्वाइन फ्लू का कहर बरप रहा है और यहां जीका वायरस, इबोला, क्राइमिक कांगो हेमरेजिक फीवर जैसी वायरोलॉजी की बीमारियां भी सामने आ चुकी हैं।

प्रदेश की मेडिकल कॉलेजों के अधीन अस्पतालों में संक्रामक बीमारियों का इलाज तो हो रहा है, किन्तु इन गंभीर प्रकृति की संक्रामक बीमारियों पर अनुसंधान नहीं हो रहा था। इसलिए कांग्रेस सरकार ने अपने पिछले कार्यकाल के दौरान प्रदेश में एकमात्र संक्रामक रोग संस्थान जोधपुर में खोला था। संस्थान में पूरे प्रदेश के गंभीर संक्रामक रोगों की चपेट में आए मरीजों के इलाज के साथ ही इस संस्थान को नॉर्थ इण्डिया में संक्रामक बीमारियों पर शोध के लिए सेन्टर फॉर एक्सीलेंस बनाना था। लेकिन स्थायी फैकल्टी के अभाव व माइक्रोबायलॉजी लैब के अपग्रेड नहीं होने से संस्थान की वर्किंग जोधपुर तक ही सिमट कर रह गई है। आईसीयू बना हुआ है, लेकिन संचालन में नहीं हैं। जानकारी के अनुसार तत्कालीन भाजपा सरकार के समय संस्थान को बजट घोषणा की पालना में बजट मिला था, लेकिन उस बजट से लैब में उपकरण ही खरीदे जा सके। तत्कालीन सरकार ने संस्थान फैकल्टी के पद भरने की तरफ गंभीरता नहीं दिखाई।


संक्रमण पर काम कर रहे देश में इंस्टीट्यूट-

संक्रामक बीमारियों पर रिसर्च को लेकर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी पुणे में हैं। इसके अलावा दिल्ली एम्स एवं क्रिश्चयन मेडिकल कॉलेज वैल्लोर में संक्रामक रोग पर विभाग चलाए जा रहे हैं। लेकिन संक्रामक बीमारियों पर रिसर्च का पहला संस्थान जोधपुर में ही खोला गया। जोधपुर के संस्थान को क्रिश्चयन मेडिकल कॉलेज वैल्लोर तथा अन्तरराष्ट्रीय जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी यूएसए से भी जोड़ा गया।
मेडिसिन ओपीडी का संचालन

संक्रामक रोग संस्थान जोधपुर में मेडिसिन के प्रोफेसर व प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. आलोक मोहता मेडिसिन ओपीडी चलाते हैं। इसके अलावा शिशु रोग व माइक्रोबायलॉजी के सहायक आचार्य तथा एक वरिष्ठ विशेषज्ञ कार्यरत है।


अभी यह हो रहा-

-एचआइवी व एड्स पीडि़त मरीजों की जांच व उपचार के लिए एआरटी ओपीडी व सेन्टर चलाया जा रहा है। यहां मरीजों को राहत मिल रही है।

-संक्रामक रोगियों को भर्ती करने के लिए पुरुष 30 बैड व महिला 20 बैड का इनडोर है।
-रोगों के नमूनों की जांच के लिए माइक्रोबायोलॉजी, बायोकेमेस्ट्री व पैथोलॉजी लैब संचालित है।

-डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज की ओर से अस्थायी चिकित्सक की ड्यूटी निर्धारित कर संस्थान की मेडिकल ओपीडी व आइपीडी चलाई जा रही है।


यह है दरकार-

-संस्थान में मेडिसिन, शिशु रोग व माइक्रोबायोलॉजी विशेषज्ञों की स्थायी फैकल्टी लगाई जाएं, ताकि विभिन्न संक्रामक बीमारियों पर रिसर्च व ट्रेनिंग, सर्टिफिकेट व फैलोशिप कोर्स के काम शुरू किया जा सकें। डीएम कोर्स भी यहां से हो सके।
-संस्थान में वायरोलॉजी की लैब की महत्ती दरकार है, ताकि प्रदेश में वायरस जनित गंभीर बीमारी जैसे, कांगो, इबोला, जीका आदि के सैम्पल जांच के लिए पूणे भेजने के बजाय जोधपुर में ही करवाई जा सकें। संचालित जांच प्रयोगशालाओं के अपग्रेडेशन की जरूरत है।

पदों की स्थिति
पद ----------------------------स्वीकृत --------रिक्त

चिकित्सक --------------------8 --------------3
नर्सिंग स्टाफ -----------------20-------------- 10

लैब टेक्नीशियन ---------------3 --------------3
अन्य स्टाफ --------------------2 ----------------2

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बनाना है सेन्टर फॉर एक्सीलेंस
बीते पांच साल में संक्रामक रोग संस्थान में संक्रमण वाली बीमारियों से पीडि़त मरीजों के इलाज को लेकर बहुत काम हुआ है। एआरटी केन्द्र्र में अच्छा काम हो रहा है। लेकिन स्थायी फैकल्टी व तीनों लैब के अपग्रेडशन के अभाव में रिसर्च व कोर्सेज के काम अभी नहीं हो सके हैं। सरकार को पूरा प्रोजेक्ट भेजा गया है। उम्मीद है कि प्रदेश की नई सरकार इस संस्थान को राष्ट्रीय स्तर का सेन्टर फॉर एक्सीलेंस बनाने की दिशा में काम करेगी।

-डॉ. नवीन किशोरिया, नोडल अधिकारी, संक्रामक रोग संस्थान, जोधपुर



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