जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट ने मंगलवार को मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के बाद 22 सप्ताह की गर्भवती 17 वर्षीय बलात्कार पीडि़ता के गर्भपात की अनुमति दे दी।
दायर याचिका पर सुनवाई
न्यायाधीश अशोक कुमार गौड़ ने यह आदेश चित्तौडगढ़ निवासी बलात्कार पीडि़ता की पिता के माध्यम से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद दिए। पीडि़ता के पिता ने गर्भपात की अनुमति के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और बाद में राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण से मदद मांगी थी। जिसकी दखल के बाद अधिवक्ता अंकुर माथुर ने हाईकोर्ट के समक्ष याचिका पेश कर बताया कि पीडि़ता नाबालिग होने के साथ स्कूल में अध्ययनरत है। इस उम्र में पीडि़ता के गर्भपात की अनुमति नहीं दी गई तो उसके प्राण और दैहिक स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार का हनन होगा।
जबरन शारीरिक संबंध बनाए
याचिका में बताया गया कि आरोपी वेनीराम सुथार ने करीब 5-6 महीने पहले पीडि़ता के साथ धोखा करते हुए जबरन शारीरिक संबंध बनाए। कुछ दिनों पहले जब पीडि़ता की तबीयत खराब हुई तब उसे स्थानीय डॉक्टर को दिखाने पर यह पता चला कि पीडि़ता गर्भवती है। माथुर ने बताया कि पीडि़ता के पिता को घटनाक्रम की जानकारी होने पर पुलिस थाने में आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (2) (जे) सपठित धारा 3/4 पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज करवाया गया। जिसकी जांच चल रही है।
डॉक्टरों ने मना कर दिया
उन्होंने बताया कि जब स्थानीय डॉक्टरों को गर्भपात के लिए कहा गया तो उन्होंने यह कहते हुए मना कर दिया कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट 1971 के तहत 20 सप्ताह से अधिक के गर्भ को समाप्त करने की अनुमति नहीं है। पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मेडिकल कॉलेज उदयपुर को मेडिकल बोर्ड गठित कर पीडि़ता के स्वास्थ्य की जांच व गर्भपात के संबंध में चिकित्सकीय मत प्रकट करने के आदेश दिए थे। मंगलवार को सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता पंकज शर्मा ने मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पेश की। जिसमें गर्भपात की स्थिति में पीडि़ता के स्वास्थ्य को लेकर किसी तरह का खतरा नहीं बताने पर कोर्ट ने अनुमति प्रदान कर दी।
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