गजेंद्र दहिया/जोधपुर. पहली स्वदेशी तोप धनुष अगले महीने सेना में शामिल होगी। बोफोर्स तोप से 11 किलोमीटर अधिक दूरी तक मार करने वाली इस तोप को सबसे पहले राजस्थान और जम्मू कश्मीर की सीमा पर तैनात किया जाएगा। बोफोर्स तोप के करीब तीन दशक बाद सेना को नई तोप मिल रही है। इससे सेना की मारक क्षमता में काफी वृद्धि होगी। बोफोर्स जहां 27 किलोमीटर तक मार कर सकती है वहीं धनुष से फैंका गया गोला 38 किलोमीटर तक जाएगा। फरवरी में सेना को छह धनुष तोपें दी जाएंगी। साल के अंत तक 12 और तोपों मिल जाएंगी। सेना इन्हें अपनी प्राथमिकता के अनुसार तैनात करेगी।
सैन्य सूत्रों के अनुसार नासिक के पास स्थित स्कूल ऑफ आर्टलिरी देवलाई में धनुष तोप का इंडक्शन कार्यक्रम फरवरी में होगा। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने की संभावना है। धनुष तोप कार्यक्रम 2010 में शुरू हुआ था। धनुष का परीक्षण सर्द मौसम में सिक्किम व लेह, आद्र्रता भरे मौसम में उड़ीसा के बालासोर और गर्म मौसम में राजस्थान के पोकरण में किया गया था। अब तक परीक्षण के दौरान धनुष से 5 हजार गोले दागे जा चुके हैं। सूत्रों के अनुसार धनुष तोप जोधपुर स्थित कोणार्क कोर को प्राप्त होगी, जिसे बाद में यहां से श्रीगंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर सीमा पर बोफोर्स तोप के स्थान पर तैनात किया जाएगा।
स्वीडिश बोफोर्स तोप को अस्सी के दशक में राजीव गांधी की सरकार के समय सेना में शामिल किया गया था। बाद में विवादों में फंस गई बोफोर्स तोप पर 40 मिलीमीटर की गन लगी है, जबकि धनुष 155 गुणा 45 केलिबर की है। इसमें अमरीका से आयातित होवित्जर एम-777 गन और कोरिया से आयातिक के-9 व्रज गन लगाई गई है। होवित्जर की क्षमता 30 किलोमीटर तक है जबकि के-9 वज्र की मारक क्षमता 38 किलोमीटर तक है। धनुष के 90 फीसदी पाट्र्स भारत में बने हैं। इसे फैक्ट्री ऑर्डिनेंस बोर्ड के अंतर्गत आने वाली जबलपुर स्थित गन कैरिज फैक्ट्री ने बनाया है। तीन साल में सेना को 114 धनुष तोप की आपूर्ति की जाएगी।
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