New York में गूंजेगा केसरिया बालम, प्रवासी राजस्थान वासी विदेशों में बजवाएंगे मायड़ भाषा का डंका

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अरविंद सिंह राजपुरोहित/जोधपुर. कहीं गूंजेंगे केसरिया बालम के गीत तो कहीं होगा राजस्थानी शूरवीरों की गाथाओं का बखान, कहीं गूंजेगी धरती धोरा री तो कहीं रंग बिखेरेगी राजस्थानी संस्कृति की महक। जी हां यह सब कुछ होगा सात समंदर पार स्थित अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में। जहां राजस्थानी संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राजस्थानियों का सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। सम्मेलन के संयोजक एवं राजस्थानी एसोसिएशन ऑफ नार्थ अमेरिका (राणा) के पूर्व चैयरमैन नवीन शाह कार्यक्रम के प्रचार प्रसार के सिलसिले में बुधवार को जोधपुर आए। इस दौरान राजस्थान पत्रिका से बातचीत में उन्होंने राना एवं सम्मेलन से जुड़ी विभिन्न जानकारियां साझा की। शाह ने बताया कि राजस्थान की संस्कृति को हमेशा देश-विदेशों में सराहा जाता है। यहां की मिट्टी में वो खुशबू है जो सात समंदर पार भी राजस्थानियों के दिलों में राज करती है। यही वजह है की इस तरह के आयोजन को करने का लक्ष्य रखा गया।

दशकों से दिल में बसा राजस्थान

शाह ने बताया कि वो राजस्थान से कोसों दूर अमेरिका में 36 वर्षों से रह रहे हैं। इसके बावजूद यहां की संस्कृति उनके दिल और दिमाग में बसी है। साथ ही बताया कि उनके जैसे सैकड़ों परिवार बरसों से विदेशों में रह रहे हैं, लेकिन आज भी अपनी राजस्थानी संस्कृति को नहीं भूले हैं। इसलिए मायड़ भौम की इसी संस्कृति, अपणायत को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उनके संयोजन में अगले वर्ष 3 से 7 जुलाई तक राजस्थानी सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें न सिर्फ न्यूयॉर्क बल्कि नार्थ अमेरिकन देशों के हजारों परिवार इस कार्यक्रम का हिस्सा बनेंगे। इस सम्मेलन में विभिन्न सत्र आयोजित होंगे। जिसमें प्रथम आपसी सहयोग से राजस्थानी संस्कृति का विकास, सामाजिक एवं भौतिक गतिविधियों को प्रोत्साहन, इन्वेस्टमेंट, पर्यटन को बढ़ावा देने एवं विश्व पटल पर राजस्थान का नाम उंचाइयों पर ले जाने के लिए मंथन किया जाएगा। तीन दिन तक चलने वाले इस कार्यक्रम में राजस्थानी संस्कृति, खान-पान, पहनावे एवं संगीत को साझा करने के लिए विभिन्न आयोजन होंगे।

विदेश में होगा मान्यता दिलाने के लिए मंथन
शाह ने बताया कि राना की ओर से स्थापना के बीस वर्षों से ही राजस्थान के लोगों को विदेशों में सहायता के साथ ही समाज कल्याण से जुड़े विभिन्न कार्य किए जा रहे हैं। राजस्थानी भाषा की मान्यता के सवाल पर उन्होंने कहा कि राजस्थानी भाषा की मान्यता के लिए विशेष सत्र का आयोजन कार्यक्रम में होगा जिसमें शिरकत करने के लिए राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को भी निमंत्रण दिया गया है। इसमें राजस्थानी भाषा की मान्यता के लिए क्या करना चाहिए। इस पर चर्चा की जाएगी।

कार्यक्रम का 40 प्रतिशत रेवेन्यू होगा राजस्थानी संस्कृति के संरक्षण में खर्च

शाह ने बताया कि इस कार्यक्रम से प्राप्त होने वाले 40 प्रतिशत रेवेन्यू को राजस्थानी संस्कृति के प्रोत्साहन एवं बढ़ावा देने के उद्देश्य से खर्च किया जाएगा। इस पैसे का सदुपयोग सामाजिक कल्याण, संस्कृति, कला, साहित्य को प्रोत्साहित करना है।



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