जोधपुर.
जिले भर में स्वाइन फ्लू का खौफ बढ़ रहा है और प्रतिदिन स्वाइन फ्लू के मरीज सामने आ रहे हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर के चिकित्सा संस्थान अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जोधपुर एम्स) में इसकी जांच की सुविधा तक नहीं है। जोधपुर में एम्स की स्थापना हुए छह साल हो चुके हैं, लेकिन एम्स में स्वाइन फ्लू के इलाज के लिए अलग से वार्ड तक शुरू नहीं किया गया है।
स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मरीज आने पर विभागों के अलग-अलग वार्डों में ही भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। ऐसे में जिस वार्ड में स्वाइन फ्लू मरीज को भर्ती किया जा रहा है, उस वार्ड के अन्य मरीजों पर भी संक्रमण का खतरा मंडराता है। चौंकाने वाली बात यह है कि एम्स में स्वाइन फ्लू की जांच भी नहीं होती। किसी मरीज के संदिग्ध होने पर एम्स की ओर से सैम्पल लेकर एसएन मेडिकल कॉलेज भेजे जाते हैं। यहां से रिपोर्ट आने पर एम्स में इलाज होता है, लेकिन संदिग्ध मरीजों को भी एम्स में अन्य मरीजों के साथ भर्ती किया जा रहा है।
एम्स अस्पताल के उप अधीक्षक डॉ. नवीनदत्त ने बताया कि एम्स में स्वाइन फ्लू के लिए अलग से कोई वार्ड नहीं है। संदिग्ध मरीज आने पर उसका सैम्पल लेकर एसएन मेडिकल कॉलेज भिजवाया जाता है।
गौरतलब है कि एम्स का खुद का मेडिकल कॉलेज है, लेकिन स्वाइन फ्लू को लेकर एम्स के पास कोई सिस्टम नहीं है। ऐसे में पश्चिमी राजस्थान के अधिकतर मरीजों का दबाव संभाग के सबसे बड़े मथुरादास माथुर अस्पताल पर पड़ रहा है।
जांच किट भी नहीं, केवल सैम्पल लेते हैं
एम्स में स्वाइन फ्लू संदिग्ध मरीज सामने आने पर उनके स्वाब का सैम्पल लेकर एसएन मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी लैब भेजा जाता है। सैम्पल लेने का किट भी एम्स को एसएन मेडिकल कॉलेज ही उपलब्ध करवा रहा है। एम्स के पास सैम्पल लेने के किट तक उपलब्ध नहीं है। किसी भी मरीज की रिपोर्ट पॉजीटिव आने पर एसएन मेडिकल कॉलेज की ओर से मरीज सहित एम्स को सूचना भेजी जाती है।
अब तक 10 मौतें-
गौरतलब है कि जोधपुर जिले में 01 जनवरी से 27 दिसम्बर तक 10 मौतें हो चुकी है और 198 पॉजीटिव मरीज सामने आ चुके हैं। आपको बता दें कि 22 दिसम्बर को एक ही दिन में तीन मरीजों की जान चली गई थी।
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