जोधपुर। राज्य के बहुचर्चित जीवनराम गोदारा हत्याकाण्ड का आरोपी व आजीवन कारावास की सजा काट रहे आनंदपाल सिंह गैंग के गुर्गे की जोधपुर सेन्ट्रल जेल में शनिवार को संदिग्ध हालात में मृत्यु हो गई। जेल प्रशासन को अंदेशा है कि हार्ट अटैक से उसकी मृत्यु हुई है। जबकि परिजन ने मौत पर संदेह जताया। न्यायिक मजिस्ट्रेट मामले की जांच करेंगे।
रातानाडा थाना पुलिस के अनुसार नागौर जिले में लाडनूं थानान्तर्गत पांडोली गांव निवासी प्रताप सिंह पाण्डोराई (40) पुत्र टंवर सिंह राजपूत आनंदपाल सिंह का साथी था। वह जीवनराम गोदारा हत्याकाण्ड में आरोपी था। वह आजीवन कारावास की सजा काट रहा था। उसे गत 21 जून को जोधपुर जेल रैफर किया गया था, जहां शनिवार सुबह साढ़े आठ बजे उसकी तबीयत खराब हो गई।
जेल डिस्पेंसरी में जांच के बाद उसे महात्मा गांधी अस्पताल ले जाया गया, जहां जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया गया। पुलिस ने परिजन को सूचित कर शव मोर्चरी में रखवा दिया। जेल प्रशासन की शिकायत पर रातानाडा थाने में मर्ग दर्ज किया गया। शाम को परिजन जोधपुर पहुंचे। तब न्यायिक मजिस्टे्रट की देखरेख में पोस्टमार्टम की तैयारी शुरू की गई।
लम्बे अर्से तक फरार, जोधपुर में पिस्तौल सहित पकड़ा था पुलिस का कहना है कि प्रताप सिंह के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास विभिन्न प्रकार के आठ-दस मामले दर्ज हैं। जीवन गोदारा हत्याकांड में एसओजी लम्बे समय से उसकी तलाश में थी। तब वर्ष 2015 में जोधपुर की राजीव गांधी थाना पुलिस ने एक पिस्तौल के साथ उसे गिरफ्तार किया था। तब से वह जेल में बंद था। हत्या के मामले में उसे आजीवन कारावास की सजा थी।
परिजन का आरोप
जान का खतरा था मृतक के परिजन का कहना है कि जेल में बंद रहने के दौरान प्रताप सिंह को अपनी जान का खतरा था। वो दूसरी जेल में स्थानान्तरण कराना चाहता था। जेल से बाहर आने के लिए कोर्ट में आवेदन पत्र लगा था। जिस पर दो दिन बाद ही सुनवाई होनी थी। परिजन को उम्मीद थी कि वह जेल से बाहर आ जाएगा, लेकिन उससे पहले उसका शव बाहर आ गया। परिजन का कहना है कि जेल में ही उसकी हत्या की गई है। वह एक-दो घंटे तक जेल में तड़पता रहा था। समय पर इलाज के लिए नहीं ले जाया गया।
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