अभिषेक बिस्सा/जोधपुर. शहर में वाहनों की पार्र्किंग न केवल बड़ी समस्या बल्कि बड़ा मुद्दा भी है। दिवाली से पहले शहर को गांधी मैदान में अंडरग्राउंड मल्टीलेवल पार्किंग की सौगात मिली, लेकिन शहरवासी इस सुविधा का लाभ ही नहीं ले रहे हैं। ऐसे में यह पार्किंग सुविधा सवा दो माह बाद भी फ्लॉप साबित हो रही है। इस पार्र्किंग में प्रतिदिन महज 15 से 20 वाहन ही पार्क किए रहे हैं। जबकि इसकी क्षमता 763 दुपहिया व चौपहिया वाहनों की हंै। शहर के व्यस्तम सरदारपुरा क्षेत्र में सडक़ पर बढ़ते ट्रेफिक समस्या से निजात दिलाने के लिए यह सुविधा शुरू की गई थी, लेकिन दो माह बाद भी कई व्यापारी व ग्राहक अपने वाहन पार्र्किंग में नहीं रख रहे हैं। ऐसे में करोड़ों रुपयों में बनी पार्र्किंग से नगर निगम पचास हजार रुपए का राजस्व भी प्रतिमाह नहीं कमा पा रहा है।
हकीकत : द्वितीय अंडर ग्राउंड पूरा खाली, ऊपर मिले 16 वाहन
सरदारपुरा गांधी मैदान अंडर ग्राउंड पार्र्किंग का बुधवार को पत्रिका टीम ने जायजा लिया। यहां अंडरग्राउंड तल में 15 चौपहिया वाहन पार्र्किंग में नजर आए। दो-तीन दुपहिया वाहन नजर आए। जबकि भू-तल का द्वितीय भाग पूरी तरह से खाली नजर आया। मौजूद जिम्मेदारों ने बताया कि ज्यादातर लोग अभी पार्र्किंग गेट के सामने अपने वाहन रख चले जाते हैं, लेकिन पार्र्किंग में अपने वाहन रखने में बहुत कम लोग रूचि दिखा रहे हैं। यातायात पुलिस भी कोई कार्रवाई नहीं कर रही। जबकि निगम की इस पार्र्किंग का एरिया 10 हजार 561 स्कवायर मीटर है। इसका निर्माण 21 करोड़ 57 लाख रुपए में हुआ।
बड़ा सवाल: फिर कैसे सुगम होगा यातायात
इस पार्र्किंग का शुभारंभ 15 अक्टूबर को आचार संहिता के बीच शहरवासियों की सुविधा के मद्देनजर अधिकारियों ने किया था। इसके बाद यातायात पुलिस ने त्योहार में सख्ती दिखाई। इस कारण दिवाली सीजन में पार्र्किंग में बड़ी संख्या में वाहन नजर आए। त्योहार खत्म होने के बाद पार्र्किंग में केवल डेढ़ दर्जन वाहन नजर आ रहे हैं। फिलहाल पार्र्किंग में कुछेक चौपहिया वाहन चालकों ने मासिक सुविधा के आधार पर अपने वाहन रखने शुरू किए हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि इस व्यस्त बाजार में यातायात सुगम कैसे हो?
नो पार्र्किंग जोन : नाम की घोषणा, कोई सख्ती नहीं
पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय व यातायात) ने 26 अक्टूबर को एक आदेश जारी कर सरदारपुरा बी व सी रोड और प्रथम, द्वितीय व तृतीय रोड सुबह दस से रात दस बजे तक चार पहिया वाहनों के लिए नो पार्र्किंग जोन घोषित किया था। जबकि हकीकत में घोषणा का कोई असर तक नहीं है। इन क्षेत्र में दिनभर चार पहिया वाहन सडक़ के बीचों-बीच खड़े नजर आते हैं। पुलिस व यातायात पुलिस के अधिकारी-जवान मूक दर्शक बने रहते हैं।
मैंने कल ही अधिकारियों के साथ पार्किंग का निरीक्षण किया। मौके पर 16 वाहन खड़े नजर आए। पार्र्किंग से निगम को महज 30 हजार रुपए मिल रहे हैं और 6 लाख रुपए मेंटेनेंस का खर्चा आ रहा है। मेरी सभी से अपील है कि ज्यादा से ज्यादा लोग अपने वाहन पार्र्किंग में रखें, ताकि सडक़ पर यातायात सुगम रहे और सभी के वाहन भी सुरक्षित रहेंगे।
- घनश्याम ओझा, महापौर
इस तरह समझें पार्र्किंग की गणित
- 763 वाहनों की क्षमता है गांधी मैदान अंडरग्राउंड मल्टीलेवल पार्र्किंग में
- 16 वाहन ही पार्क हो रहे औसतन
- 21.57 करोड़ की आई थी लागत
- 06 लाख आ रहा मेंटेनेंस खर्चा
- 30 हजार रुपए मात्र मिल रहे निगम को पार्र्किंग से
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