राजेश दीक्षित/जोधपुर. चुनाव परिणाम घोषित हो गए। कांग्रेस सरकार बनाने को तैयार। जोधपुर ने भी इस बार दिल खोलकर कांग्रेस को अपना वोट दिया। लेकिन अब एक सवाल भी उभर रहा है, इस बार जोधपुर से मंत्रिमंडल में किसको जगह मिलेगी। हालांकि इस बार पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के अलावा शेष छह विधायक पहली बार विधानसभा पहुंच रहे हैं। उन्हें विधायकी का अनुभव नहीं है। लेकिन इतिहास की बात करें तो पिछली सात सरकारों में जोधपुर जिले का प्रतिनिधित्व होता ही रहा है। यह प्रतिनिधित्व कभी एक तो कभी दो तो कभी चार मंत्रियों का भी रहा है। वर्तमान सरकार में भी लगातार दो मंत्री बने ही रहे। अर्जुनलाल गर्ग के बाद कमसा मेघवाल को मंत्रिमंडल में जगह मिली थी। यूं पूरे कार्यकाल में तीन मंत्री मिले थे।
यूं समझे पिछली सात सरकारों में जोधपुर के प्रतिनिधित्व को
वर्ष 1985 में नरेन्द्र सिंह भाटी, रामसिंह विश्नोई, नरपतसिंह बरबड़ व राजेन्द्र चौधरी को मंत्रिमंडल में जगह मिली थी। वर्ष 1990 में भाजपा की भैंरोसिंह शेखावत की सरकार बनी। उस समय भाजपा के मोहन मेघवाल व रामनारायण विश्नोई को सरकार में जगह मिली। इसके बाद 1993 में दुबारा शेखावत की ही सरकार बनी। इस बार जसवंत सिंह विश्नोई व राजेन्द्र गहलोत को स्थान मिला। वर्ष 1998 में राज्य में कांग्रेस सरकार आई और अशोक गहलोत मुख्यमंत्री बने। बाद में सरदारपुरा सीट से उपचुनाव जीते। जोधपुर जिले से मुख्यमंत्री ही नहीं मिला, बल्कि तीन मंत्री और मिले। यानी यूं कहें कि चार प्रमुख विधायक मंत्री बन गए थे। इसमें खेतसिंह राठौड़, रामसिंह विश्नोई व राजेन्द्र चौधरी को मंत्रिमंडल में स्थान मिला। वर्ष 2003 में फिर भाजपा सरकार बनी। इस बार एक मंत्री जोधपुर जिले के खाते में आए। रामनारायण डूडी को जगह मिली। साथ ही जोगाराम पटेल संसदीय सचिव भी बने। वहीं 2008 में कांग्रेस की सरकार आई तो अशोक गहलोत मुख्यमंत्री के रूप में तो मंत्री के रूप में महिपाल मदेरणा कुछ समय तक रहे।
गत सरकार की बात करें तो यहां से पूरे पांच साल में तीन मंत्री मिले हैं, लेकिन लगातार दो मंत्री बने ही रहे। इसमें गजेन्द्र सिंह खींवसर पूरे पांच साल रहे, वहीं अर्जुनलाल गर्ग को बीच में हटना पड़ा, लेकिन उनके हटते ही कमसा मेघवाल को यह मौका मिल गया। कमसा मेघवाल जिले से एक मात्र महिला मंत्री भी बनी हैं। साथ ही भैराराम चौधरी को संसदीय सचिव भी बनाया गया।
...इस बार कौन?
इस बार कांग्रेस ने 1998 के बाद अच्छा परिणाम दिया है। इस बार दस में से 7 सीटों पर कांग्रेस ने परचम फहराया। लेकिन अशोक गहलोत के अलावा शेष कांग्रेस विधायक ‘नए खिलाड़ी’ हैं। इनमें से तीन तो महिलाएं ही हैं। अब राजनीतिक गलियारों में एक सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या इस बार भी जोधपुर को मंत्रिमंडल में जगह मिलेगी? यदि हां तो किसके सिर पर ताज होगा?
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