बयानों-आरोपों में खो गई जनता की तकलीफें, चुनावों से पहले जन के जो मुद्दे उठे थे उनकी अब कोई चर्चा नहीं

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जोधपुर. शहर सहित जिले के ऐसे कई मुद्दे हैं जो कि चुनाव से पहले खूब उठे। सरकारी विभागो में हलचल हुई और नेताओं के वादे भी आए। लेकिन जैसे ही आचार संहिता लगी, चुनावी सरगर्मियों ने जोर पकड़ा तो जनता के मुद्दे कहीं खो गए। उनके स्थानीय एजेंडे की जगह बयानों और आरोपों ने ले ली। कई नेता जो भी बातें कैमरे के सामने या सभा में बोल रहे हैं वह सिवाय जातिगत राजनीति और आपसी हमले के अलावा कुछ नहीं है। जबकि धरातल पर समस्याएं जस की तस है।


1. जाम हो जाता पूरा शहर - परकोटे के भीतर बसा शहर और प्रमुख सडक़ों पर जाम की स्थिति बन जाती है। शाम के समय तो पावटा, नई सडक़, सोजती गेट, जालोरी गेट से लेकर आखलिया तक की सडक़ पर वाहन मानो रेंगते हैं। लेकिन राजनीतिक दल ऐसी समस्याओं को तवज्जो नहीं दे रहे।

2. आवारा मवेशी - शहर की प्रमुख सडक़ों, गली, चौराहों के साथ उद्यानों में आवारा मवेशियों का राज है। ये मवेशी कई बार हादसों का कारण बनते हैं। चौपासनी हाउसिंग बोर्ड के कई उद्यानों में तो इनका ही राज है। यह जमीन से जुड़ी समस्याएं हैं लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं।

3. गंदगी - घर-घर कचरा संग्रहण और सफाई के तमाम दावों के बीच असलियत सामने आती है। आमजन इस समस्या से रोज दो-चार होता है। इन मुद्दों पर कोई ध्यान नहीं दे रहा। सभी मोहल्लों में अस्थाई डम्पिंग यार्ड मिल जाएंगे। लेकिन समाधान बिल्कुल नहीं।

4. पेयजल - जोधपुर शहर के लिए पेयजल का मुद्दा अभी सबसे गर्म है। एक माह में दो बार 24-24 घंटे का शटडाउन लिया जा रहा है। लेकिन कोई इस ओर नहीं ध्यान दे रहा। योजनाएं लाई जा रही है लेकिन घोषणा पत्र में यह कहीं नहीं कि पानी की उपलब्धता को बढ़ाया या सहज किया जाएगा।


5. ड्रेनेज - बरसाती पानी की निकासी की व्यवस्था हमारे शहर में बिगड़ी है। ड्रेनेज मास्टर प्लान लागू ही नहीं किया जा रहा है। कई सडक़ों और मोहल्लों में पानी भरने की समस्या है। यह समस्या गत वर्षों में जानलेवा हो चुकी है। ऐसी गंभीर समस्या को भी किसी ने चुनावी घोषणा पत्र में शामिल नहीं किया।

6. सडक़ें - शहर की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक टूटी सडक़ें हैं। आचार संहिता से पहले कई करोड़ रुपए इसके लिए राशि जारी हुई। लेकिन आज भी यह समस्या सबसे बड़ी है। सरकारें हाईवे के कार्य ही सडक़ों में गिनाते हैं। लेकिन आमजन की प्रतिदिन काम आने वाली सडक़ें बदाहल हैं।



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