अभिषेक बिस्सा/जोधपुर. शहर में मुख्य सडक़ को छोड़ अधिकांश अंदरुनी भागों में सफाई का ढर्रा बिगड़ा हुआ है। सडक़ पर झाड़ू लगते हैं, लेकिन नालियां डटी रहती है। कचरा स्थलों से समय पर कचरा नहीं उठता। कई गलियों में हर रोज सीवरेज बहना आम बात है। जबकि हमारी सफ ाई विंग के पास 50 से ज्यादा आधुनिक संसाधन हैं। मुख्य रोड व वीआईपी लोगों के आगमन के दौरान रोड की सफ ाई के लिए रोड स्वीपिंग मशीन है तो नालों की सफ ाई के चैन टाइप लोडर भी हंै। ट्रंक लाइन सीवरेज की सफ ाई करने के लिए बलशाली जेटिंग मशीनें भी मौजूद है। इसके अलावा जेसीबी, लोडर, ट्रैक्टर सहित कई कचरा परिवहन के साधन है। हर माह जोधपुर में सफाई के नाम 4-5 करोड़ रुपए का खर्चा आता है। तकरीबन हर साल 60 करोड़ रुपए के खर्च के बावजूद जोधपुर में सफाई व्यवस्था चौपट है। वर्तमान में 15 लाख की आबादी वाले जोधपुर शहर के 65 वार्डों में 34 सौ स्थाई कर्मी है, इनमें से 14 सौ प्रोबेशन पीरीयड पर है। सौ से ज्यादा संविदा पर हैं।
परेशानी का पैमाना
-प्रदेश के दूसरे बड़े शहर जोधपुर में अरबों रुपए सफाई के नाम खर्च हो चुके हैं।
- सलाहकार के तौर पर वेल्लूर से श्रीरामनिवास व बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान तक को बुलाया गया। उसके बावजूद शहर में सफाई व्यवस्था पटरी पर नहीं आई।
- 2008 में कनक, 2012-13 में रामकी एनवायरो इंजीनियरिंग दिल्ली, 2014 में श्रीनिवासन, वेल्लूर के रिसोर्स पर्सन का आगमन, 2015 में स्मार्ट कॉलोनी व स्मार्ट वार्ड प्रणाली और अब 2018 में चार-चार वार्डों का कलस्टर योजना आई है। एक भी योजना ढंग से सिरे नहीं चढ़ पाई।
सरकार यह करें
- केन्द्र सरकार के साथ राज्य व स्थानीय निकाय भी स्वच्छता को लेकर लोगों को अवेयर करे। स्वच्छता के नाम पर अब किसी तरह से राजनीति नहीं हो।
- स्कूल व कॉलेज में ज्यादा से ज्यादा विद्यार्थियों को जागरुक किया जाए। सडक़ किनारे कचरे फेंकने पर ज्यादा से ज्यादा लोगों को जागरुक किया जाए। इसके लिए सरकार संकल्पबद्ध रहे।
- अगर शहर के हरेक नागरिक शपथ दिलाई जाए कि घर में कचरा एकत्रित करेंगे और सफाई के लिए आने वाले वाहन में ही कचरा डालेंगे तो मोहल्ले व सडक़ पर गंदगी नहीं दिखेगी। शहर में लगे डस्टबिन को जलाया न जाए। स्मार्ट डस्टबिन में कचरा डाले, पास में नहीं।
यहां से सीखें
मध्यप्रदेश का शहर इंदौर सफाई व्यवस्था में देश में सबसे आगे है। यहां नगर निगम व शहरवासी सभी सफाई व्यवस्था को लेकर सतर्क है। इंदौर में एक बार गोगानवमी पर 5 हजार सफाईकर्मी छुट्टी पर निकल गए। इसके बाद शहर के एनजीओ, विभिन्न संगठन व शहरवासी सफाई के लिए सडक़ पर आ गए। इंदौर में सफाई व्यवस्था सुढृढ़ रखना लोगों के लिए जुनून बन गया है। साफ-सुथरे शहरों को रोल मॉडल मान कई कार्यक्रम जोधपुर में शुरू है, लेकिन इनको गंभीरता से नहीं लिया जाता।
एक्सपर्ट
हमने सभी शहरवासियों को स्वच्छता की शपथ दिलवाई और उनका जागरूक किया। 4 सौ से ज्यादा व्यापारिक व सामाजिक संगठनों की बैठकें ली। घर-घर कचरा संग्रहण का काम शुरू किया। कचरा पेटियां हटा दी। घर-घर गीला-सूखा कचरा के बॉक्स रखे हुए। वे निगम की गाडिय़ों में गीले में गीला व सूखे में सूखा कचरा डालते है। रात को डेढ़ बजे सफाई देखने जाती हूं। स्वयं मॉनिटरिंग करते है तो साथ में अधिकारी स्वयं मॉनिटरिंग में लग जाते है।
- मालिनी गौड़, महापौर, इंदौर शहर
जनप्रतिनिधि
शहर में सफाई व्यवस्था वाकई व्यवस्थित नहीं है। सफाई के लिए ढंग से कोई प्रणाली नहीं है। जो मॉनिटरिंग है, वह सुव्यवस्थित नहीं है। महापौर अधिकारियों व कर्मचारियों से व्यवस्थित काम कराए, तो व्यवस्था पटरी पर आ सकती है। हमारी सरकार चंद दिनों पहले आई है, लंबे समय से बीजेपी का बोर्ड है व सरकार थी।
- मनीषा पंवार, विधायक, जोधपुर शहर
वैसे सफाई को लेकर लोग खूब उलाहना देते है। सफाई के लिए वाकई में मॉनिटरिंग जरूरी है। सभी बीटवाइज अपना व्यवस्थित कार्य करें। इसके बाद सफाई में सुधार जरूर आएगा।
- सूर्यकांता व्यास, विधायक, सूरसागर
आमजन
सोजती गेट की बारी से हर रोज सुबह 11 बजे से कचरा नहीं हटता। उसके बाद फिर गंदगी बढऩा शुरू हो जाती है। बरसाती नाला पूरा गंदगी से अटा पड़ा है। यहां गंदगी के कारण लोग नीचे गिर जाते है। गंदगी से भरे ट्रेक्टर यहां उड़ेल दिए जाते है।
- कुलदीपसिंह, सोजती गेट, व्यापारी
शहर में सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चौपट है। हमारे घर के आसपास गंदगी के ढेर लगे रहते है। सफाईकर्मी मनमर्जी से सफाई कर चले जाते है। निगम के वाहन कब कचरा उठाने आएंगे, इसका कोई निश्चित समय नहीं है। कुछ स्थान तो गंदगी के लिहाज से डंपिंग स्टेशन बन गए है।
- रेखा मूथा, नायों का बड़
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