गजेंद्र दहिया/जोधपुर. भारतीय वायुसेना का युद्धाभ्यास वायु शक्ति: 2018 अगले साल 16 फरवरी को जैसलमेर के पोकरण में होगा। इसमें देश की वायुसेना की सभी कमाण्ड हिस्सा लेंगी। फायरिंग रेंज में युद्ध जैसी परिस्थितियों में लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर का प्रदर्शन होगा। करीब 500 एयरक्राफ्ट भारी गोला बारुद व मिसाइलों के साथ हमले का अभ्यास करेंगे। युद्धाभ्यास देखने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी आने की संभावना है लेकिन उनके कार्यक्रम को फिलहाल अंतिम रूप नहीं दिया गया है। भारतीय वायुसेना और जैसलमेर जिला प्रशासन की दो दिन पहले आयोजित बैठक में वायुशक्ति : 2018 की व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई। युद्धाभ्यास के लिए जैसलमेर जिला प्रशासन पानी, बिजली और स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं उपलब्ध करवाएगा।
युद्धाभ्यास में सुखोइ-30 एमकेआइ, मिग-21 (बायसन), मिग-27 (अपगे्रडेड), मिग-29, जगुआर, मिराज-2000 और तेजस लड़ाकू विमान हिस्सा लेंगे। सी-17 ग्लोब मास्टर, सी-130 जे, एएन-32, एमब्रर, आइएल-76, आइएल-78 जैसे ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट से युद्धक सामग्री ढोने का काम किया जाएगा। एमआइ-35, एमआइ-17वी 5, एएलएच ध्रुव हेलीकॉप्टर शामिल होंगे। युद्धाभ्यास के दौरान यूएवी (मानव रहित विमान) का भी विशेष प्रदर्शन होगा।
पूरे युद्धाभ्यास को अवाक्स प्रणाली (एयरबोर्न वार्निंग एण्ड कंट्रोल सिस्टम) के जरिए नियंत्रित किया जाएगा। इस दौरान जमीन से हवा में और हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों का भी प्रयोग किया जाएगा। सुखोई-30 सहित अन्य लड़ाकू विमानों से छद्म दुश्मन सेना के ठिकानों पर मिसालों दागी जाएगी। फायरिंग रेंज में टैंक, राडार, यार्ड, आतंकवादी कैंप, रन-वे, इन्फेंटरी, सैन्य टुकड़ी, यूएवी जैसे टारगेट बनाए जाएंगे जिन पर लड़ाकू विमानों के साथ हेलीकॉप्टर से नई तकनीक व रणनीति के तहत हमला किया जाएगा।
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